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Sela Tunnel: सेला टनल को इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर ने दी मान्यता, आधिकारिक तौर पर माना भारत की सबसे ऊंची सुरंग

Sat, 11 May 2024 04:48 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीमा सड़क संगठन (BRO) उत्सव मना रहा है। क्योंकि इंग्लैंड की इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर ने सेला सुरंग को देश की सबसे ऊंची सुरंग के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दी है।
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BRO India - फोटो : X/@BROindia
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विस्तार
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सीमा सड़क संगठन (BRO) उत्सव मना रहा है। क्योंकि इंग्लैंड की इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर ने सेला सुरंग को देश की सबसे ऊंची सुरंग के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दी है।
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2.598 किलोमीटर लंबी यह सुरंग तेजपुर-तवांग रोड पर 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। और इसका निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) भारत द्वारा किया गया है। यह सड़क सुनिश्चित करेगी कि रणनीतिक रूप से अहम तवांग क्षेत्र में साल भर संपर्क बना रहे।  
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अरुणाचल के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया ट्विटर पर अपने हैंडल पर लिखा, "मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई है कि इंग्लैंड की इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर ने सेला सुरंग को देश की सबसे ऊंची सुरंग के रूप में मान्यता दी है। यह 2.598 किमी लंबा इंजीनियरिंग का कमाल @BROindia द्वारा तेजपुर-तवांग मार्ग पर 13000 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। जिसने अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक क्षेत्र में संपर्क में काफी तेजी ला दी है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मार्च को अरुणाचल प्रदेश में दुनिया की सबसे लंबी दो-लेन सुरंग, सेला सुरंग का उद्घाटन किया।

13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेला सुरंग अरुणाचल प्रदेश में तवांग को हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करेगी। डबल लेन वाली यह ऑल वेदर टनल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामिंग और तवांग जिले को जोड़ेगा। एलएसी तक पहुंचने वाला यह एक मात्र रास्ता है। 

सुरंग के उद्घाटन के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा, "आपने 'मोदी की गारंटी' के बारे में जरूर सुना होगा। अरुणाचल आने पर आप इसके महत्व को समझ जाएंगे। पूरा पूर्वोत्तर इसका गवाह है। मैंने 2019 में यहीं सेला सुरंग की आधारशिला रखी थी और आज इसका उद्घाटन हो गया है।"
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इस टनल की जरूरत क्यों?
सेला दर्रे पर वर्तमान में, भारतीय सेना के जवान और क्षेत्र के लोग तवांग पहुंचने के लिए बालीपारा-चारीदुआर रोड का उपयोग कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी के कारण सेला दर्रे में भयंकर बर्फ जम जाती है। इससे रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। साथ ही, दर्रे पर 30 मोड़ आते हैं, जो बहुत ही घुमावदार हैं। इस कारण यहां आवाजाही पर पूर्ण रूप से  बाधित हो जाती है। सफर के लिए कई-कई घंटों तक का इतंजार करना पड़ता है। इस दौरान पूरा तवांग सेक्टर देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। सेला दर्रा सुरंग मौजूदा सड़क को बायपास करेगी और यह बैसाखी को नूरानंग से जोड़ेगी। इसके साथ ही सेला सुरंग सेला-चारबेला रिज से कटती है, जो तवांग जिले को पश्चिम कामेंग जिले से अलग करती है।
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