इलेक्ट्रिक स्कूटर चोरी होने का एक मामला सामने आया है। खास बात यह है कि एक खास फीचर की मदद से स्कूटर मालिक को स्कूटर वापिस मिल गया। किस फीचर की मदद से मालिक को स्कूटर वापिस मिला। आइए जानते हैं।
आजकल के वाहनों में कई फीचर्स के साथ ही सेफ्टी फीचर्स को भी दिया जाता है। जिसके कारण चोरी होने पर भी उन्हें आसानी से ढूंढा जा सकता है। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि एक इलेक्ट्रिक स्कूटर के चोरी होने के बाद एक स्मार्ट फीचर की मदद से उसे कैसे वापिस मालिक के पास पहुंचाया गया।
विज्ञापन
क्या है मामला
2 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
सोशल मीडिया पर ओला स्कूटर के चोरी होने और फिर खास फीचर की मदद से वापिस मिलने तक की जानकारी एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की ओनर से शेयर की है। जिसे काफी सराहा जा रहा है। राजस्थान के जोधपुर में रहने वाली अंजलि नाम की युवती ने अपने सामान के साथ अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर को उत्तराखंड के देहरादून में शिफ्ट करने के लिए पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी की सहायता ली। लेकिन कंपनी ने उसके इलेक्ट्रिक स्कूटर को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की। जिसके बाद युवती ने इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी और पुलिस से सहायता ली और स्कूटर एक महीने बाद वापिस मिल गया।
ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर की ओनर अंजलि ने अपने स्कूटर को वापिस पाने की पूरी कोशिश की। सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक अंजलि ने स्कूटर के लिए ओला के कस्टमर केयर सहित पुलिस से मदद मांगी। जिसके बाद कंपनी ने स्कूटर की लोकेशन की जानकारी साझा की। चोरी करने वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि स्कूटर की लोकेशन को जीपीएस के कारण ट्रेस किया जा सकता है लेकिन ओला के पास स्कूटर की लोकेशन की जानकारी थी, जिसकी बदौलत स्कूटर की असली मालिक को स्कूटर वापिस मिल गया।
जीपीएस की मदद से स्कूटर वापिस मिलने के बाद ओनर से स्थानीय पुलिस और ओला इलेक्ट्रिक को धन्यवाद किया। अपनी पोस्ट पर ओनर ने लिखा कि मुझे मेरा ओला स्कूटर वापिस मिल गया है। इसके लिए ओला इलेक्ट्रिक और जोधपुर पुलिस को विशेष तौर पर धन्यवाद। क्योंकि कंपनी की ओर से कई बार चोरी हुए इलेक्ट्रिक स्कूटर की लोकेशन की जानकारी दी गई थी।
जीपीएस का मतलब ग्लोबल पोजिशन सिस्टम होता है। अगर इसे किसी वाहन में लगाया जाए तो वह वाहन की लोकेशन और अन्य जानकारी को साझा करता है। इससे यह पता चल जाता है कि वाहन कहां पर है और अगर उसे कहीं और ले जाया जाता है तो लगातार लोकेशन की जानकारी अपडेट होती रहती है। हालांकि इसकी भी सीमा होती है क्योंकि जीपीएस सिग्नल कई बार बिल्डिंग या अन्य कारणों से मिलने में परेशानी भी होती है।