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E20 Fuel: पेट्रोलियम मंत्रालय का बयान- इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर फैलाया जा रहा डर बेबुनियाद

Tue, 12 Aug 2025 07:48 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोशल मीडिया पर 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) से गाड़ियों पर असर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस ईंधन से माइलेज में भारी गिरावट की बात सही नहीं है।
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Ethanol blending with Petrol - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) से गाड़ियों पर असर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस ईंधन से माइलेज में भारी गिरावट की बात सही नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि E20 से माइलेज पर मामूली असर पड़ सकता है, लेकिन यह बेहतर एक्सीलरेशन देता है।
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किसानों की आमदनी बढ़ाने और प्रदूषण घटाने की योजना
E20 पेट्रोल, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल (गन्ना या मक्का से बना) और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका मकसद कार्बन उत्सर्जन कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। मंत्रालय का आरोप है कि कुछ लोग गलत जानकारी देकर और इंश्योरेंस को लेकर डर फैलाकर इस योजना को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।

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Ethanol blending with Petrol - फोटो : Adobe Stock
इंश्योरेंस पर कोई असर नहीं
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि E20 इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस कंपनियां गाड़ी के नुकसान का खर्च नहीं उठाएंगी। मंत्रालय ने इसे पूरी तरह गलत बताया और कहा कि एक इंश्योरेंस कंपनी के ट्वीट को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। E20 ईंधन के इस्तेमाल का गाड़ियों के इंश्योरेंस की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता।

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Ethanol blending with Petrol - फोटो : AI
माइलेज पर कितना असर
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि आलोचकों का "ड्रास्टिक" माइलेज गिरने का दावा गलत है। हालांकि, मंत्रालय ने खुद माना है कि E20 में ऊर्जा घनत्व पेट्रोल से कम होने के कारण थोड़ी कमी हो सकती है - E10 के लिए बनी और E20 के मुताबिक एडजस्ट की गई चार-पहिया गाड़ियों में 1-2 प्रतिशत तक, और बाकी गाड़ियों में 3-6 प्रतिशत तक।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि कई निर्माता 2009 से ही E20-कम्पैटिबल गाड़ियां बना रहे हैं, जिनमें माइलेज पर कोई खास असर नहीं पड़ता। 

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सिर्फ फ्यूल टाइप से तय नहीं होता माइलेज
सरकार का कहना है कि गाड़ी का माइलेज ड्राइविंग हैबिट, मेंटेनेंस, टायर प्रेशर, एलाइनमेंट और एसी के इस्तेमाल जैसे कई फैक्टर्स पर भी निर्भर करता है।

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Delhi Traffic - फोटो : PTI
प्रदूषण कम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा
नीति आयोग के एक अध्ययन के मुताबिक, गन्ना-आधारित इथेनॉल से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 65 प्रतिशत और मक्का-आधारित इथेनॉल से 50 प्रतिशत तक कम होता है। पिछले 11 वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक सेक्टर) की तेल कंपनियों ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर 1.44 लाख करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा बचाव किया, 245 लाख टन कच्चे तेल की जगह ली, और 736 लाख टन CO2 (कार्बन-डाई-ऑक्साइड) उत्सर्जन घटाया, जो 30 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

इस साल 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग के साथ किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का भुगतान और 43,000 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा बचाव होने का अनुमान है।

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Delhi Traffic - फोटो : PTI
बेहतर परफॉर्मेंस और तकनीकी फायदे
E20 का ऑक्टेन नंबर (108.5) पेट्रोल (84.4) से ज्यादा है, जिससे गाड़ियां बेहतर एक्सीलरेशन देती हैं — खासकर शहर में ड्राइविंग के लिए। यह इंजन की नॉकिंग कम करता है और एयर-फ्यूल मिक्स को ज्यादा घना बनाकर पावर बढ़ाता है।

पहले भारत में बिकने वाले पेट्रोल का RON (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) 88 था, जो अब BS-VI मानकों के तहत 91 हो गया है। E20 मिलाने से यह और बढ़कर 95 हो गया, जिससे परफॉर्मेंस और सुधरती है।

 

तेल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
कीमत क्यों ज्यादा है
कुछ लोगों का कहना है कि इथेनॉल सस्ता होने की वजह से E20 की कीमत भी कम होनी चाहिए, लेकिन मंत्रालय के मुताबिक अब हालात उलट हैं। जब 2020-21 में नीति आयोग की रिपोर्ट बनी थी, तब इथेनॉल सस्ता था। अब इसकी खरीद कीमत पेट्रोल से ज्यादा है, जो औसतन 71.32 रुपये प्रति लीटर, जिसमें ट्रांसपोर्ट और जीएसटी शामिल है। मक्का-आधारित इथेनॉल 71.86 रुपये प्रति लीटर है। 

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
गाड़ी मालिकों के लिए सपोर्ट सिस्टम
मंत्रालय ने कहा कि अगर किसी वाहन मालिक को लगता है कि उसकी गाड़ी को E20 के लिए ट्यूनिंग या पार्ट बदलने की जरूरत है, तो अधिकृत सर्विस सेंटर्स की पूरी नेटवर्क मदद के लिए तैयार है। 

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