बढ़ते टैरिफ से प्रतिस्पर्धा में आएगी कमी
दाइवा इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च के अर्थशास्त्री कोकी अकीमोटो का मानना है कि जैसे-जैसे टैरिफ दरें तय होंगी और जापानी कंपनियां अमेरिका में अपने बढ़े हुए खर्च को ग्राहकों तक पहुंचाएंगी, वैसे-वैसे उनकी प्रतिस्पर्धा घटेगी और बाजार में उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
निर्यात आंकड़ों में दिखा असर
जून महीने में जापान के कुल निर्यात में सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि बाजार में 0.5 प्रतिशत बढ़त की उम्मीद थी। मई में यह गिरावट 1.7 प्रतिशत रही थी, जो पिछले आठ महीनों में पहली बार थी।
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अमेरिका को निर्यात में सबसे बड़ी गिरावट
अमेरिका को जापान का निर्यात जून में सालाना आधार पर 11.4 प्रतिशत घट गया, जो फरवरी 2021 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। इस दौरान ऑटोमोबाइल का निर्यात 26.7 प्रतिशत घटा, ऑटो पार्ट्स में 15.5 प्रतिशत की गिरावट आई और दवाइयों का निर्यात 40.9 प्रतिशत तक गिर गया।
कीमतें घटाकर टैरिफ झेल रहे जापानी ऑटोमेकर
हालांकि, वाहन निर्यात की मात्रा में 3.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई है, जिससे साफ है कि जापानी ऑटो निर्माता टैरिफ के प्रभाव को झेलने के लिए कीमतें कम कर रहे हैं और अपने मार्जिन की कुर्बानी देकर प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। SMBC निक्को सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अर्थशास्त्री कोया मियामाए के मुताबिक, जापानी कंपनियों ने फिलहाल प्रोडक्शन लेवल बनाए रखा है, लेकिन यह रणनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती।
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लंबे समय में कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होंगे जापानी कंपनियां
दाइवा के अकीमोटो का कहना है कि अगर ट्रेड डील में देरी होती रही और येन मजबूत बनी रही, तो जापानी कंपनियां आखिरकार कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होंगी। साल 2023 में जापान ने अमेरिका को करीब 21 ट्रिलियन येन का माल निर्यात किया था। जिसमें से करीब 28 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ऑटोमोबाइल का था।
जून में जापान-अमेरिका ट्रेड सरप्लस में 22.9% की गिरावट
जून में अमेरिका के साथ जापान का व्यापार अधिशेष 22.9 प्रतिशत घटकर 669 अरब येन (करीब 4.51 अरब डॉलर) रह गया। वहीं, चीन को निर्यात में भी 4.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
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आयात में मामूली बढ़त, ट्रेड सरप्लस उम्मीद से कम
जून में जापान का कुल आयात 0.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बाजार को इसमें 1.6 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद थी। नतीजतन, देश का ट्रेड सरप्लस 153.1 अरब येन (करीब 1.03 अरब डॉलर) रहा, जो अनुमानित 353.9 अरब येन से काफी कम है।
अमेरिकी टैरिफ ने और गहरा किया जापानी अर्थव्यवस्था पर दबाव
जापान पहले ही घरेलू मांग कमजोर होने और महंगाई बढ़ने से आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है। पहले तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था सिकुड़ चुकी है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ से बढ़ा यह दबाव जापान के लिए नई चुनौती बन गया है।
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जापान के सेंट्रल बैंक पर भी असर डाल सकती है यह स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेड डील और टैरिफ को लेकर जारी अनिश्चितता के चलते जापान का सेंट्रल बैंक फिलहाल ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं रहेगा और अर्थव्यवस्था में मंदी के जोखिम को ध्यान में रखते हुए सतर्क रवैया अपनाएगा।
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