भारत था सीजन ओपनर का संभावित दावेदार
2026 का मोटोजीपी सीजन 27 फरवरी 2025 से थाईलैंड जीपी के साथ शुरू होगा, उसके बाद ब्राजील, अमेरिका और कतर राउंड होंगे। भारत को अगले सीजन की शुरुआत के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था। क्योंकि कतर रेस रमजान के महीने से टकरा रही थी, जिसकी वजह से वहां आयोजन मुश्किल था। फरवरी-मार्च के ठंडे मौसम को भारत के लिए अनुकूल माना गया था, क्योंकि 2023 में सितंबर की तेज गर्मी राइडर्स के लिए परेशानी का कारण बनी थी। हालांकि ट्रैक की गुणवत्ता की राइडर्स ने तारीफ की थी।
अब तक Dorna (मोटोजीपी के प्रमोटर) की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि भारतीय जीपी को कैलेंडर से क्यों हटाया गया है।
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पहले वादे हुए लेकिन आयोजन नहीं हो पाया
मोटोजीपी के प्रमोटर Dorna (डोरना) ने पहले ऐलान किया था कि भारत 2024 में फिर से कैलेंडर में शामिल होगा, लेकिन बाद में इसे मार्च 2025 तक टाल दिया गया। आयोजकों ने "मौसम संबंधी चिंताओं" को वजह बताया था। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स ने दावा किया कि भारतीय प्रमोटर फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स ने डोरना को समय पर भुगतान नहीं किया था। जवाब में फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स ने कहा था कि 2024 के आम चुनावों की वजह से भुगतान में देरी हुई, जिसकी जानकारी डोरना को पहले से थी।
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UP सरकार ने किया नया करार, लेकिन नतीजा अधर में
बावजूद इन अड़चनों के, एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने डोरना के साथ तीन साल का नया समझौता किया। अगस्त 2024 में सरकार ने नया रेस प्रमोटर चुनने के लिए टेंडर निकाला था, लेकिन इसे सितंबर में वापस ले लिया गया। इससे संकेत मिला कि इवेंट को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है।
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Dorna की आखिरी आधिकारिक स्टेटमेंट में कहा गया, "ऑपरेशनल परिस्थितियों की वजह से 2025 की शुरुआत में प्रस्तावित इवेंट को आगे बढ़ाना पड़ा है। चूंकि साल के आखिर में कोई तारीख उपलब्ध नहीं है, इसलिए मोटोजीपी भारत में 2026 की शुरुआत में वापसी करेगा। मोटोजीपी और InvestUP (इन्वेस्ट यूपी) मिलकर एक वर्ल्ड-क्लास इवेंट लाने के लिए काम कर रहे हैं। और भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए एक अहम जगह बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।"
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F1 और Formula E की तरह MotoGP भी नहीं जमा पाया रंग
मोटोजीपी का भारत में आना और इतनी जल्दी उसकी वापसी न हो पाना एक दुर्भाग्यपूर्ण दोहराव है। इससे पहले Formula 1 (2011-2013) और Formula E (2023) जैसी इंटरनेशनल रेसिंग इवेंट्स भी भारत में आए, लेकिन वे भी लंबे समय तक नहीं टिक पाए। इन इवेंट्स का मकसद भारत को मोटरस्पोर्ट्स के ग्लोबल नक्शे पर लाना था। लेकिन व्यवस्थागत अड़चनों और प्रबंधन की खामियों ने इन कोशिशों को कमजोर कर दिया।
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