बरसात के समय पर कार के टायर ही गाड़ी को सड़क पर अच्छी पकड़ बनाने में मदद करते हैं। साथ ही कार की रफ्तार भी टायरों पर निर्भर करती है। बरसात के बाद गाड़ी चलाना इसलिए भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि पानी अपने साथ एक परत तैयार कर लेता है। ऐसे में जब गाड़ी के टायर उस परत को काटते हुए आगे बढ़ते हैं तो जाहिर सी बात है कि टायरों पर बुरा असर पड़ता है। अगर कार लगातार बरसात के पानी से गुजरती है तो ऐसा संभव है कि टायरों की लाइफ इससे कम हो जाती है।
बारिश के दौरान कार के टायरों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह टायरों के डिजाइन पर भी निर्भर करता है। कई वाहन कंपनियां कार के टायरों में काफी गहरा खांचा लगाती है। इस वजह से बरसात के दौरान इन खांचों में ज्यादा पानी चला जाता है। अगर एक बार बरसात का पानी इन खांचो में भर गया तो फिर कार सड़क पर अपना संतुलन खो देती है और फिसलना शुरू हो जाती है। ऐसे में कार के टायरों का डिजाइन काफी अहम होता है।
बरसात के दौरान कार चलाने में एक और दिक्कत आती है। दरअसल, बारिश के बाद सड़कों पर कई तरह की अड़चन सामने आती है, जिनमें कीचड़ के साथ मलबा भी एक बड़ी परेशानी है। कार के टायरों की लाइफ कई बार मलबे की वजह से कम हो जाती है। सड़क पर पड़े मलबे में काफी कुछ होता है, जैसे- कांच, पत्थर और कोई नुकीली चीज आदि। इस वजह से बारिश के वक्त कार के टायरों पर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे में इस परेशानी से दूर रहने के लिए खराब सड़कों पर जाने से बचना चाहिए।