दरअसल, शराब पीकर गाड़ी चलाते वक्त पकड़े जाने पर ट्रैफिक पुलिस एक सांस एनालाइजर डिवाइस के जरिए टेस्ट करती है। अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो चालक को जुर्माना देना होता है। वहीं, कई बार देखा गया है कि लोग शराब पीकर वाहन नहीं चलाते हैं, मगर फिर भी सांस एनालाइजर डिवाइस में पॉजिटिव पाए जाते हैं। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि डिवाइस में कुछ दिक्कत होगी, मगर ऐसा नहीं है।
सांस एनालाइजर डिवाइस पॉजिटिव टेस्ट आने के पीछे ऑटो ब्रेवरी सिंड्रोम जिम्मेदार होता है। इस सिंड्रोम में व्यक्ति को शराब की तरह ही नशा होता है। ऐसे में वह अपना शारीरिक और मानसिक संतुलन गंवा बैठता है। इस सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति का शरीर लगातार कार्बोहाइड्रेट एल्कोहल पैदा करता रहता है। ऐसे में अगर इंसान अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन करता है, तो इसका असर शरीर पर एक नशे की तरह दिखता है। यही वजह है कि जब ट्रैफिक पुलिस सांस एनालाइजर डिवाइस के जरिए टेस्ट करती है तो व्यक्ति का टेस्ट पॉजिटिव आता है। हालांकि, व्यक्ति ने शराब नहीं पी हुई होती।
ऐसे में अगर कोई भी इंसान इस समस्या से पीड़ित है तो उसे ट्रैफिक चालान से बचने के लिए हमेशा अपने पास डॉक्टरों के कागज रखने चाहिए, ताकि कभी ड्रिंक एंड ड्राइव में ट्रैफिक पुलिस वाले आपको पकड़े तो आप चालान से बच सकें।