ये तो आप जानते ही होंगे कि कार में एक्सलेरेटर, ब्रेक और क्लच दिया जाता है। कार का वजन दो पहिया वाहनों के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। मगर फिर भी गाड़ी को रोकने के लिए एक ही ब्रेक होता है। कार में चार पहिए होते हैं और गाड़ी के चारों पहियों को रोकने के लिए एक ही ब्रेक का इस्तेमाल होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार के ब्रेक को कंट्रोल करने के लिए डबल चैंबर मास्टर सिलेंडर दिया गया होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि इस फीचर की वजह से कार के सभी ब्रेक एकसाथ खराब नहीं होते हैं। अगर एक तरफ के ब्रेक फेल हो जाए तो अन्य ब्रेक अपना काम करते रहते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार में इंजन की जगह के मुताबिक, ब्रेक की क्षमता को कम या बढ़ाया जा सकता है। बाजार में आने वाली अधिकतर कारों में फ्रंट व्हील ड्राइव का विकल्प मिलता है। इन कारों में इंजन आगे की तरफ दिया गया होता है। यही वजह है कि कार का ज्यादा वजन आगे की तरफ रहता है। इसी वजह से इन कारों में आगे के ब्रेक काफी ताकतवर दिए गए होते हैं। वहीं, रियर व्हील ड्राइव वाली गाड़ियों में पीछे के ब्रेक अधिक पावरफुल दिए गए होते हैं। कार के ब्रेक आगे की ओर 60 फीसदी और पीछे की तरफ 40 फीसदी लगे होते हैं।