देश के कई प्रमुख कार निर्माताओं को कथित तौर पर मैनडेटरी फ्लीट एमिशन लेवल का पालन नहीं करने का दोषी पाया है। जिससे इनमें से हरेक ब्रांड पर भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है, जो कि कई करोड़ रुपये तक हो सकती है।
देश के कई प्रमुख कार निर्माताओं को कथित तौर पर मैनडेटरी फ्लीट एमिशन लेवल का पालन नहीं करने का दोषी पाया है। जिससे इनमें से हरेक ब्रांड पर भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है, जो कि कई करोड़ रुपये तक हो सकती है।
विज्ञापन
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किआ, ह्यूंदै, रेनो, स्कोडा, फॉक्सवैगन और निसान जैसे कार निर्माताओं को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) (BEE, बीईई) द्वारा मैनडेटरी फ्लीट एमिशन लेवल का उल्लंघन करते हुए पाया गया है। बीईई ने केंद्र सरकार से भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट इस बात पर रोशनी डालती है कि इन कार निर्माताओं को तुरंत ऐसे वाहनों की ओर बढ़ना होगा जो या तो कम प्रदूषण फैलाते हैं या ऊर्जा के हरित स्रोतों पर चलते हैं।
मौजूदा हालात को देखते हुए यह बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहर जहरीले प्रदूषण स्तर से जूझ रहे हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक या AQI कई शहरों और कस्बों में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। भले ही यह हर सर्दी के मौसम की शुरुआत में आनेवाला एक खतरा बन गया है। और हर साल दोष का एक बड़ा हिस्सा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर मढ़ा जाता है।
विज्ञापन
car pollution
- फोटो : For Reference Only
मैनडेटरी फ्लीट एमिशन लेवल क्या है
अपडेटेड कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनोमी (CAFE) (सीएएफई) मानदंड इस साल जनवरी से देश में लागू हो गए है। इसका लक्ष्य अनिवार्य रूप से वाहन उत्सर्जन स्तर को कम करना है। इसे किसी ब्रांड के पूरी फ्लीट पर लगाया जाता है।
किसी विशेष ब्रांड के लिए सीएएफई लक्ष्य की गणना कैसे होती है। यह व्यक्तिगत मॉडल के वजन और बेची गई यूनिट्स की संख्या को ध्यान में रखते हुए ब्रांड के कॉर्पोरेट औसत वजन के हिसाब से की जाती है। यह एक ब्रांड के तहत सभी मॉडलों और बेचे गए प्रत्येक मॉडल की सभी यूनिट्स के लिए किया जाता है। अंतिम और अनिवार्य फ्लीट - या CO2 - उत्सर्जन स्तर या सीएएफई लक्ष्य की गणना इन संख्याओं के आधार पर की जाती है। यदि किसी विशेष कंपनी के बेड़े का उत्सर्जन स्तर अनिवार्य आंकड़ों से ऊपर है, तो जुर्माना लगाया जा सकता है।
2022 के दिसंबर तक, प्रति किलोमीटर 130 ग्राम CO2 का आधार लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जबकि उद्योग का औसत वजन 1,037 किलोग्राम था। भले ही प्रत्येक कंपनी के लिए लक्ष्य अलग-अलग थे। जनवरी 2023 से यह और अधिक सख्त हो गया है। जिसमें प्रति किलोमीटर 113 ग्राम C02 का आधार लक्ष्य रखा गया है। जबकि उद्योग का औसत वजन 1,145 किलोग्राम है।
फाइल फोटो
- फोटो : एएनआई
यहां यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है कि कार निर्माता स्वच्छ या कम से कम क्लीन टेक्नोलॉजी पर चलने वाले मॉडल लाकर अतिरिक्त क्रेडिट हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मॉडल के लिए तीन क्रेडिट, प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल के लिए 2.5 और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक मॉडल के लिए दो क्रेडिट दिए जाते हैं। तो, किसी कंपनी द्वारा बेचे गए प्रत्येक फुल-इलेक्ट्रिक मॉडल को तीन के रूप में गिना जाएगा, और इसी तरह पूरी गणना होती है।
निर्माता विशिष्ट टेक्नोलॉजी भी ला सकते हैं जिनका लक्ष्य ईंधन की बचत करना है। आइडिल स्टार्ट-स्टॉप, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और यहां तक कि टायर-प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे फीचर्स की वजह से वाहन के CO2 की दोबारा गणना होती है।
कार निर्माताओं पर लग सकता है जुर्माना
रिपोर्ट के मुताबिक, जो बीईई द्वारा की गई गणना का हवाला देती है, किआ ब्रांडों के बीच सबसे ज्यादा जुर्माना लगा सकता है। सीएएफई सीमा से लगभग 4.4 यूनिट ऊपर होने पर किआ पर 373 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा सकती है। ह्यूंदै को भी तय सीमा से 7.7 यूनिट ज्यादा होने पर 370 करोड़ रुपये का जुर्माना झेलना पड़ा है। होंडा कार्स, रेनो, निसान और स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन को भी दंड का सामना करना पड़ सकता है।
लेकिन कथित तौर पर गणना से यह भी पता चलता है कि टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, एमजी मोटर इंडिया, टोयोटा, मर्सिडीज-बेंज इंडिया, जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो जैसे निर्माता हैं जो 'सुरक्षित' क्षेत्र में हैं। इनमें से ज्यादातर ब्रांड बाजार में सीएनजी या हाइब्रिड या ऑल-इलेक्ट्रिक मॉडल पेश करते हैं, जो अनिवार्य CO2 उत्सर्जन स्तर से नीचे रहने में मदद करते हैं।