कार में सवारियों की सुरक्षा के लिए दिए गए एयरबैग्स एक सॉफ्ट सरफेस होता है, ये किसी क्रैश के दौरान ड्राइवर समेत सभी सवारियों को एक मुलायम सरफेस देता है, ताकि उन्हें किसी तरह की चोट न लगें। एयरबैग्स अधिकतर स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड और साइड पैनल पर होते हैं। एयरबैग्स एक पतली लेयर के साथ फोल्ड हुआ नॉयलॉन फेब्रिक का बना होता है। कार के चारों तरफ सेंसर लगे होते हैं, जिससे कुछ भी टकराने के बाद कार इन्हें खुलने के लिए कहती है। इसके बाद पोटैशियम नाइट्रेट की प्रक्रिया के साथ नाइट्रोजन गैस उत्पन्न करती है। नाइट्रोजन गैस नॉयलॉन फैब्रिक में जाती है, इसके बाद ये 300 किलोमीटर से भी ज्यादा की रफ्तार के साथ खुलता है।
एयरबैग्स कार का पैसिव सेफ्टी फीचर है। हादसे के दौरान ड्राइवर और सवारियों ने सीटबेल्ट नहीं पहनी है तो एयरबैग्स सवारियों को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, सीटबेल्ट पहनने पर सवारियां अपनी जगह पर सुरक्षित रहती है।
एयरबैग्स कार में बैठी सवारियों की सुरक्षा सही से करें, इसके लिए जरूरी है कि डैशबोर्ड से 10 इंच की जगह होनी चाहिए। साथ ही स्टीयरिंग व्हील से ड्राइवर के बीच की दूरी कम से कम 10 इंच होनी चाहिए।
कार के हादसे के दौरान एयरबैग्स सही तरीके से अपना काम करें। इसके लिए जरूरी है कि ड्राइवर का हाथ स्टीयरिंग व्हील पर 3 से 9 की पॉजीशन में होना चाहिए। अगर ड्राइवर की ऐसी पॉजीशन नहीं होती है तो हादसे के दौरान एयरबैग्स खुलने पर ड्राइवर के हाथ में गंभीर चोट लग सकती है।
एयरबैग्स 12 साल से अधिक आयु वाले लोगों के लिए डिजाइन किया जाता है। ऐसे में 12 साल से कम उम्र के बच्चों को आगे बैठाने पर उन्हें चोट या बड़ा नुकसान हो सकता है।
डैशबोर्ड पर कभी भी अपनी टांगे न रखें। हादसे के दौरान अगर आप डैशबोर्ड पर टांगे रखते हैं तो हादसे के समय पर बड़ा नुकसान हो सकता है। हादसे के दौरान एयरबैग्स आगे बैठी सवारी की टांगों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर सकता है।