केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एलान किया है कि अगले तीन से चार महीनों में बायो-फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के लिए आदेश जारी कर देंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री काफी समय से भारतीय परिवहन क्षेत्र के लिए बायो-फ्यूल (जैव-ईंधन) पर चलने वाले वाहनों पर जोर दे रहे हैं। नितिन गडकरी ने एलान किया है कि अगले तीन से चार महीनों में बायो-फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के लिए आदेश जारी कर देंगे।
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गडकरी ने बुधवार को फिर कहा कि देश में जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के लिए एक नीति होगी। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, गडकरी ने कहा, "अगले 3 से 4 महीनों में, मैं एक आदेश जारी करूंगा, जिसमें सभी वाहन निर्माताओं के लिए फ्लेक्स इंजन वाले वाहनों को बनाना अनिवार्य होगा।"
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यह पहली बार नहीं है जब गडकरी ने वाहनों में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के इस्तेमाल की वकालत की है। इससे पहले उन्होंने भारतीय ऑटो उद्योग की हस्तियों से वाहनों में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन पेश करने पर जोर देने की अपील की थी।
सार्वजनिक परिवहन बेड़े में हो रहा बदलाव
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत अपने सार्वजनिक परिवहन बेड़े को बायो-सीएनजी, इथेनॉल, मीथेनॉल, इलेक्ट्रिक और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे ग्रीन ईंधन में स्थानांतरित कर रहा है। गडकरी ने दावा किया कि ग्रीन ईंधन समाधान पर जोर देने से नागरिकों को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से कुछ राहत मिलेगी।
गडकरी ने कहा, "भारत उत्पादन के लिए वार्षिक रोड-मैप, 2025-26 तक इथेनॉल की आपूर्ति और इसके देशव्यापी मार्केटिंग के लिए एक सिस्टम के जरिए एक उल्लेखनीय रूप से हासिल करने योग्य स्वच्छ ऊर्जा-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है।"
मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के लिए एक नीति की घोषणा करेगी। उन्होंने कहा, "यह नीति ऑटोमोबाइल निर्माताओं को ऐसे इंजन बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।"
क्या है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन
यहां यह जानना जरूरी है कि क्या होता है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन। यह सामान्य इंटर्नल कंब्शन इंजन (ICE) इंजन जैसा ही होता है। लेकिन इस लिहाज से खास होता है कि यह एक या एक से ज्यादा तरह के ईंधन से चल सकता है। कई मामलों में इस इंजन में मिक्स फ्यूल (मिश्रित ईंधन) का भी इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य भाषा में समझें तो इस इंजन में पेट्रोल और इथेनॉल या मेथनॉल के मिश्रण का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस इंजन में ईंधन मिश्रण सेंसर का उपयोग किया जाता है जो कि मिश्रण में ईंधन की मात्रा के मुताबिक खुद को एडजस्ट कर लेता है।
ई-वाहनों को मिल रहा अच्छा रिस्पॉन्स
गडकरी का यह भी मानना है कि भारत इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम में अच्छी रफ्तार हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा, "देश में बैटरी से चलने वाले छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे ई-स्कूटर, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर, ई-रिक्शा, ई-कार्ट और ई-बाइक के लिए अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।"
गडकरी ने आगे कहा कि सड़क मंत्रालय ग्रीन हाइड्रोजन पर लंबे समय तक चलने वाली इंटरसिटी बसें चलाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, "बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन और फ्यूल सेल व्हीकल टेक्नोलॉजी दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और देश में 2050 तक जीवाश्म (पेट्रोल-डीजल) से चलने वाले मोटर वाहन से आगे निकलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"
जीवाश्म ईंधन वाले वाहनों की तुलना में भारत में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की दर अभी भी बहुत कम है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी धीमी लेकिन स्थिर हो रही है। क्योंकि आवाजाही के लिए व्यक्तिगत वाहनों की मांग और पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। कई राज्य सरकार की ईवी नीतियां और FAME-II योजना भी इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।