राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उपकरणों को सभी राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और प्रमुख शहरों में अन्य महत्वपूर्ण सड़कों पर हाई रिस्क (उच्च जोखिम) या हाई डेंसिटी (उच्च-घनत्व) वाले हिस्सों पर रखा जाए, जहां की आबादी 10 लाख से ज्यादा है। यह कदम देश भर में यातायात उल्लंघनों की संख्या को कम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कानून अपना काम करे। अधिसूचना में लगभग 132 शहरों का जिक्र किया गया है।
मंत्रालय ने यह भी कहा, "अपराध की सूचना अपराध की घटना के 15 दिनों के भीतर भेजी जाएगी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के जरिए एकत्र किए गए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को चालान के निपटान तक संग्रहीत किया जाना चाहिए।"
दिल्ली समेत कई शहरों में ई-चालान सिस्टम पहले से मौजूद है, जहां ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन के मालिक को नोटिस भेजा जाता है। मंत्रालय अब अपराध को रिकॉर्ड करने के लिए बॉडी वियरेबल कैमरा (शरीर पर पहनने वाले कैमरे) या डैशबोर्ड कैमरों जैसे उपकरणों की मदद से इसके दायरे को और अधिक स्थानों तक बढ़ाने और इसे और अधिक प्रभावी बनाने का इरादा रखता है।