भारत में होंडा काफी समय से मौजूद है। पिछले 10 महीने से ऑटो सेक्टर पर छाई मंदी का असर होंडा कार्स इंडिया पर भी पड़ा है, कंपनी अपने परिचालन के पुनर्गठन के तरीके देख रही है। कंपनी की पिछले चार सालों में वर्षों में बिक्री लगभग आधी हो गई है। ऐसे में कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बंद करने की योजना बना रही है। होंडा कार इंडिया की बिक्री चालू वित्त वर्ष में एक लाख यूनिट्स से भी कम रही है।
फिलहाल बाजार में कंपनी ने जो पैसे खर्च किये हैं उनकी वसूली करने और खराब बिक्री के साथ ब्रांड की रणनीति को फिर से प्राप्त करने के ब्रांड कथित तौर पर अपनी ग्रेटर नोएडा निर्माण सुविधा को बेच देगा। भारत में होंडा के दो मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है, जिसमें से एक ग्रेटर नोएडा में है और दूसरा राजस्थान के तापूकारा में मौजूद है। होंडा की ग्रेटर नोएडा फेसिलिटी भारत में कंपनी की पहली यूनिट है और इस प्लांट का एक हिस्सा रिसर्च एंड डेवलेपमेंट (R&D) में बदल सकता है। इसके अलावा CKD प्रोडक्ट्स के लिए एक छोटी सी असेंबली लाइन सुविधा में शुरू हो सकती है। इस समय ग्रेटर नोएडा प्लांट में प्रोडक्शन की सालाना क्षमता 1.2 लाख यूनिट्स है। लेकिन मंदी के चलते प्रोडक्शन अब 2,500 यूनिट्स प्रति महीना हो गया है।
कंपनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा बाजार के स्लोडाउन के कारण ऑटो सेक्टर इस साल तेजी से नीचे की ओर जा रहा है। हम अपने दोनों प्लांट के मध्य बिक्री के अनुसार उत्पादन घटा-बढ़ा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि हम किसी भी प्लांट को बंद नहीं करने जा रहे हैं। होंडा सीएल कंपनी भारतीय बाजार को आगे ले जाने के लिए कटिबद्ध है। हमारा लक्ष्य पर्याप्त वाहनों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहना है।