वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व
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हमारे ऋषि-मुनि ब्रह्माण्ड में छिपी हुई अनेकों शक्तियों के विषय में जानते थे। वास्तुपुरुष में यही व्याप्त शक्ति जीवनी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है जो वास्तुपुरुष में सदैव निहित रहती है। सौर ऊर्जा, ग्रहों का प्रभाव, पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति, वायु तथा अग्नि के रूप में जानी जाती है। इन सबका असर हमारे जीवन, घर और कार्य पर पड़ता है। जगत के अंदर चर-अचर सभी के ऊपर इनका प्रभाव जिस कोण से जैसे पड़ता है हम उससे प्रभावित होकर विभिन्न घटनाओं के सुखद एवं दुखद रूप से प्रभावित होते हैं। वहीं नकारात्मक ऊर्जा और सकारात्मक ऊर्जा दोनों में अंतर हमारा मस्तिष्क इसको पहचानता है।
जब हम किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, बगीचे अथवा जल के किनारे जाते हैं तो मन को शांति महसूस होती है, इसका सीधा तात्पर्य यह है कि वहां पर सकारात्मक ऊर्जा की अधिकता के कारण हम खुश और प्रांजल हो जाते हैं। और जब हम शोर-गुल, आंधी-तूफ़ान तथा कब्रिस्तान आदि के प्रभाव से गुज़रते हैं तो हमारी मानसिक स्थिति विचलित होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा के संकेत हैं। वास्तु के अनुसार कुछ ऐसे उपाय हैं जो नकारात्मक एनर्जी को दूर भगाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि करते हैं आइए जानते हैं।
किससे बचें
- घर के आंगन में सूखे एवं भद्दे दिखने वाले पेड़ या ठूंठ नहीं होने चाहिए।
- यदि आप घर में फूलों का गुलदस्ता रखते हैं तो ध्यान दें कि उन्हें प्रतिदिन बदलते रहना ज़रूरी है। सूखे हुए फूल घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।
- घर में बंद घड़ियां, टूटे दर्पण इत्यादि न रखें, पूजा कक्ष में भगवान की तस्वीर या मूर्ति खंडित नहीं हो।
- दीवारों में दरार एवं सीलन नहीं होनी चाहिए इसके अलावा घर में कहीं भी मकड़ी के जाले नहीं होने चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में कहीं भी पानी की बर्बादी होना अशुभ माना जाता है, ऐसा होना आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है।
- घर के ईशान कोण में झाड़ू-पोंछा और कूड़ादान नहीं रखना चाहिए।
क्या करें
- घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए नित्यप्रति नमक के पानी का पोंछा लगाना उत्तम रहता है।
- करियर सौभाग्य वृद्धि के लिए घर के आंगन में तुलसी का पौधा ज़रूर लगाएं।
- घर की उत्तर दिशा में लक्ष्मी, कुबेर या गणेश जी की तस्वीर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
- घर के ईशान कोण में पानी से भरा हुआ पात्र रखना शुभ फलों में वृद्धि करता है।
- सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए भवन में उत्तर-पूर्व दिशा में दरवाज़े व खिड़कियां खुली रखनी चाहिए।
- घर में बिजली सम्बन्धी उपकरण जो कर्कश ध्वनि उत्पन्न करते हों जैसे पंखे, कूलर आदि की समय-समय पर मरम्मत करवाते रहें और दरवाज़ों के कब्जों में तेल डालते रहें, खोलते या बंद करते समय आवाज़ करते हुए दरवाजे और खिड़कियां नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।