क्या है नीली या लीलिया
नीलम रत्न का प्रमुक उपरत्न नीली माना जाता है। इसे नीलिया या लीलिया नाम से भी जाना जाता है। संभवतः नीले रंग का होने के कारण ही इसे यह नाम दिया गया है।यह हल्के नीले रंग का चमकीला रत्न है। लीलिया गंगा यमुना और अन्य नदियों के रेतीले किनारों पर मिल सकता है। नीलम की तरह इसे भी ज्योतिष की सलाह अनुसार धारण करना चाहिए। सही वजन या रत्ती का उपरत्न धारण करने से जातक की तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं और उसका भाग्योदय होने की संभावना प्रबल है।
इन राशि के जातक धारण कर सकते हैं उपरत्न
यदि किसी जातक की कुंडली में शनि की अशुभ स्थिति को देखकर ज्योतिषी नीलम पहनने की सलाह देते हैं और आपके लिए यदि नीलम खरीदना संभव नहीं है तो आप उस स्थान पर आप लीलिया धारण कर सकते हैं। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ आदि राशि के नीली रत्न धारण कर सकते हैं। परंतु अन्य राशि के जातकों को इस उपरत्न को धारण नहीं कारन चाहिए। यह आपको अशुभ प्रभाव दे सकता है।
कैसे धारण करें लीलिया उपरत्न
- लीलिया या नीली उपरत्न को नीलम रत्न की तरह ही धारण करें।
- लीलिया उपरत्न को शनिवार को दोपहर के समय मध्यमा अंगुली में धारण करें।
- लीलिया उपरत्न का चौकोर होना चाहिए।
- ध्यान रखें कि यह उपरत्न अंगुली की त्वचा को छूता रहे।
- नीली उपरत्न धारण करने के बाद मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।