वैदिक ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रहों, 27 नक्षत्रों और 12 राशियों के आधार पर सभी तरह की ज्योतिषीय गणनाएं की जाती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की विशेष भूमिका होती है। सभी ग्रहों में शनि ग्रह को क्रूर ग्रह माना गया है। यह व्यक्ति को उनके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष में शनि का राशि परिवर्तन बहुत ही महत्व पूर्ण माना जाता है। शनि ग्रह सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि ढाई वर्षों में एक से दूसरी राशि में परिवर्तन करते हैं। इसके अलावा शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या बहुत ही कष्टकारी मानी जाती है। जिन राशियों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या लगी होती है उनके जीवन में तरह-तरह की समस्याएं और दुखों का सहन करना पड़ता है। हर एक कार्य में जातक को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ज्योतिष में शनि का महत्व
ज्योतिष में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। शनि की धीमी चाल चलने की वजह से जातकों के ऊपर इनका असर भी लंबे समय के लिए रहता है। वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को सेवक, पीड़ा, तकनीक और तेल आदि का कारक ग्रह माना गया है। शनि ग्रह को दो राशियां का स्वामित्व प्राप्त है। शनि ग्रह मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह होते हैं। शनि तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं।
शनि की साढ़ेसाती क्या होती है
शनि की साढ़ेसाती जब लगती है तो जातकों के जीवन में साढ़े सात वर्षों तक शनि की दशा चलती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। यह एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं। ज्योतिष में शनि चंद्र राशि के आधार पर शनि की साढ़ेसाती की गणना की जाती है। जिस राशि पर शनि की साढ़े साती रहती है उससे अगली और बारहवें स्थान वाली राशि पर साढ़ेसाती का असर रहता है। ऐसे में इन राशि में तीन-तीन चरणों में शनि की साढ़ेसाती लगती है। इसे ही साढ़ेसाती कहते हैं। शनि की साढ़ेसाती बहुत ही कष्टकारी मानी जाती है। जातक के ऊपर साढ़ेसाती का प्रभाव होने पर व्यक्ति के कार्यों में तरह-तरह की अड़चनें आती हैं। हालांकि शनि देव व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल देते हैं ऐसे में जो जातक अच्छे कर्म करता है उन पर शनि देव की हमेशा कृपा बनी रहती है।
साल 2038 तक शनि की साढ़ेसाती किन-किन राशियों पर रहेगी
वर्तमान में शनि कुंभ राशि में विराजमान हैं। शनि कुंभ राशि में ढाई वर्षों तक रहने के बाद साल 2025 में मीन राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाएगा। मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण और कुंभ राशि पर आखिरी चरण होगा। आपको बता दें कि कुंभ राशि वालों के ऊपर 3 जून 2027 तक साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा फिर इसके बाद इनको मुक्ति मिलेगी।
- जब शनि का राशि परिवर्तन साल 2025 में होगा तब मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी जो साल 2032 तक रहेगी।
- साल 2027 में वृषभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण आरंभ हो जाएगा।
- मिथुन राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती 08 अगस्त 2029 से शुरू होगी और साल 2036 पर खत्म हो जाएगी।
- कर्क राशि के जातकों पर मई 2032 से शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। इस राशि पर साढ़ेसाती 22 अक्तूबर 2038 तक रहेगी।
- साल 2025 से 2038 तक कुंभ, मीन, मेष, वृषभ और कर्क राशि के ऊपर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव बना रहेगा।
इन राशियों से खत्म होगी शनि की साढ़ेसाती
वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक साल 2025 में जब शनि का राशि परिवर्तन कुंभ से मीन राशि में होगा तब मकर राशि वालों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। इसके अलावा कर्क और वृश्चिक राशि वालों चल रही शनि की ढैय्या भी खत्म होगी।