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कुंडली का छठा भाव: शत्रु, रोग और कर्ज का भाव, जानिए सबकुछ

सार

कुंडली के छठे भाव में ग्रहों का बैठना बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। कुंडली के इस भाव शुभ और अशुभ दोनों ही तरह के ग्रहों के बैठना ज्योतिषीय नजरिए से बहुत ही अहम होता है।
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कुंडली का छठा भाव क्या कहता है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Kundli Sixth House: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली के छठे भाव से शत्रु, चिंता, कर्ज, रोग, कष्ट, भय और शोक आदि का विचार किया जाता है। कुंठली का छठा भाव रोग और शत्रु का होता है। यह भाव अपने में विरोधाभासी भाव होता है। यह भाव जहां एक तरफ रोग और विकार देता है तो वहीं रोगों से लड़ने की शक्ति भी इसी भाव से मिलती है। यह भाव कर्ज से संबंधित होता है लेकिन यही भाव कर्ज से छुटकारा भी दिलाता है। कुंडली के छठे भाव से जहां शत्रु, विरोधी और कानूनी प्रक्रिया को दर्शाता है तो यही भाव अपने दुश्मनों, विरोधियों से लड़ने की ताकत भी देता है। कुंडली के छठे भाव में अगर कोई भी ग्रह न हो तो इसे बहुत ही अच्छा माना जाता है। जन्म कुंडली के छठे भाव के स्वामी को षष्ठेश कहा जाता है। इस तरह के कुंडली का छठा भाव जो रोग और शत्रु का भाव होता है। इन सभी से को हराने के लिए छठा भाव और इस भाव के स्वामी का बलवान जरूरी होता है। वहीं दूसरी तरफ जन्म कुंडली के छठा भाव और इसका स्वामी कभी भी लग्न और लग्नेश से बली नहीं होना चाहिए। नहीं तो जातक कठिनाओं, शत्रुओं और कष्टों पर विजय नहीं प्राप्त कर पाता है। 

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कुंडली के छठे भाव को शत्रु, रोग और अरी भाव कहा है। 
कुंडली के छठे भाव के स्वामी ग्रह बुध और राशि कन्या होती है।
कुंडली के छठे भाव से व्यक्ति के शरीर के पेट और आंत का विचार किया जाता है।

कुंडली के छठे भाव में ग्रहों का बैठना बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। कुंडली के इस भाव शुभ और अशुभ दोनों ही तरह के ग्रहों के बैठना ज्योतिषीय नजरिए से बहुत ही अहम होता है। ज्योतिष में बुध, चंद्रम, गुरु और शुक्र ग्रह को शुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है वहीं सूर्य, मंगल, शनि और राहु-केतु को अशुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है। अगर कुंडली के छठे भाव में बुरे ग्रहों के बैठने पर भी अच्छा फल भी मिलता है। आइए जानते है कुंडली के छठे भाव में बुरे और शुभ ग्रहों के बैठने पर क्या-क्या प्रभाव होता है।

- कुंडली के छठे भाव में सूर्य के होने पर जातक बहुत ही संघर्षशील और मेहनती होता है। आपको काम के चलते जीवन में अच्छी प्रसिद्धि मिलती है। इस भाव में सूर्य के होने पर शत्रु आपके ऊपर हावी नहीं होंगे। आपकी प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी। 
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- कुंडली के छठे भाव में मंगल का होना अच्छा और शुभ माना गया है। मंगल को ग्रहों का सेनापति, रक्त, पराक्रम और युद्ध का कारक ग्रह माना गया है। कुंडली का छठा भाव रोग और शत्रु का होता है। ऐसे में इसमे मंगल का होना आपके दुश्मनों का नाश करने में मंगल मदद देने वाला होता है। 

- अगर शनि जातक की कुंडली के छठे भाव में है तो शनि जातक को मुसीबतों, परेशानियों और रोगों से लड़ने की शक्ति देता है।  ज्योतिष में छठे भाव में शनि हमेशा शुभ फल ही प्रदान करते हैं। 

- कुंडली के छठे भाव में राहु का होना भी अच्छा माना गया है। यानी रोग, शत्रु और परेशानियों के घर में बुरा ग्रह ही जब आकर बैठ जाए तो यह परेशानियों और शत्रुओं से लड़ता है और जीतता है। राहु के प्रभाव से व्यक्ति निरोगी और दीर्घायु होता है। 

- कुंडली के छठे भाव में बुध के होने से मानसिक परेशानियों में वृद्धि होती है। इस भाव में होने से जातक की पढ़ाई में बाधाएं आती हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आती हैं।

- कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा के बैठने से माता के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसमें आपको किसी मामले में निर्णय लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

- कुंडली के छठे भाव गुरु का होना जातक के लिए अच्छा होता है। यहां पर गुरु के होने पर व्यक्ति सदाचारी और विद्वान हो सकता है। 

-कुंडली के छठे भाव में होने से परेशानियों में वृद्धि होती है। छठे भाव में शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति को अपने भाई-बहनों और मामा से सुख मिलता है।

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