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7th House in Kundli: कुंडली के सप्तम भाव से जानिए कैसा होगा आपका जीवनसाथी

सार

7th House in Kundli: कुंडली के सातवें भाव से व्यक्ति के जीवनसाथी और व्यापार में साझेदार का विचार किया जाता है। 
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7th House in Kundli: कुंडली का सातवां भाव क्या कहता है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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7th House in Kundli: कुंडली का सप्तम भाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। कुंडली का सप्तम भाव मुख्य रूप से जीवनसाथी और साझेदारी से संबंधित होता है। कुंडली का सातवां भाव वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी, पार्टनर और काम का भाव से संबंध होता है। कुंडली का यह सातवां भाव चार केन्द्र भावों में से एक होता है। इस भाव से मुख्य रूप से जातक का जीवनसाथी कैसा होगा, उसका स्वभाव कैसा होगा, विवाह कब होगा और विवाह के योग है या नहीं, वैवाहिक सुख कितना मिलेगा, प्रेम विवाह होगा या तलाक होगा इन सभी बातों की जानकारी कुंडली के सप्तम भाव से मिलता है। 

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जन्मकुंडली के सप्तम भाव से जातक या जातिका के अपने साथी का कितना सहयोग मिलेगा इन बातों का ज्ञान होता है। कुंडली का यह भाव मुख्य रूप से पुरुष के लिए पत्नी और स्त्री की कुंडली के लिए पति का भाव होता है। कुंडली के सप्तम भाव से पहले छठा भाव आता है और उसके बाद अष्टम भाव आता है। कुंडली का छठा भाव रोग, शत्रु और कर्ज का होता है जबकि अष्टम भाव मुख्य रूप से मृत्यु का घर माना जाता है। इसलिए इस भाव का विशेष महत्व होता है। 

कालपुरुष की कुंडली में तुला राशि को सप्तम भाव का स्वामित्व प्राप्त है और तुला राशि के स्वामी ग्रह शुक्र ग्रह होते हैं। कुंडली के सातवें भाव में शुक्र ग्रह का होना शुभ माना जाता है। ऋषि पराशर के अनुसार अगर कुंडली के पहले भाव का स्वामी सातवें भाव में स्थित हो तो जातक अपने मूल स्थान को छोड़कर अन्य दूसरी जगहों पर जाकर धन संपत्ति को एकत्रित करता है। कुंडली के सातवें भाव से व्यक्ति के द्वारा गोद ली गई संतान का विचार किया जाता है। कुंडली के सप्तम भाव से मुख्य रूप से वैवाहिक जीवन, साझेदारी, विदेश यात्रा ,यौन अंग, कामुकता और सुखी जीवन का विचार किया जाता है। 
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कुंडली के सप्तम भाव में अगर कमजोर चंद्रमा हो या फिर राहु-शनि की द्दष्टि हो तो वैवाहिक जीवन शुरू में औसत होता है लेकिन बाद में परेशानियां आती हैं। वहीं अगर कुंडली सातवें घर में मंगल हो तो मांगलिक दोष लगता है और इसी भाव में मंगल और शुक्र दोनों ही हो दांपत्य जीवन में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। कुंडली के सातवें भाव में शनि या राहु होता तो तलाक की स्थिति भी बन सकती है। 
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