फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रह-गोचर: पांच ग्रहों के परिवर्तन से यह सप्ताह रहा बहुत खास, जानिए इन सबके बारे में...

Tue, 22 Jun 2021 06:14 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

22 जून को शुक्र मिथुन राशि को छोड़कर कर्क राशि में आ गए जहां पर यह मंगल के साथ युति बनाएंगे। 22 जून को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में भ्रमण पर है। इसके बाद 23 जून को युवराज बुध वृषभ राशि में मार्गी चाल यानी सीधी चाल से चलने लगेंगे। इसके अलावा सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले देवगुरु बृहस्पति कुंभ राशि में और सभी ग्रहों में मंद गति से चलने वाले शनिदेव मकर राशि में वक्री चाल से चल रहे हैं।
विज्ञापन
शुक्र मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गोचर करते हुए कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जून का यह सप्ताह बहुत खास रहा। 22 जून को शुक्र मिथुन राशि को छोड़कर कर्क राशि में आ गए जहां पर यह मंगल के साथ युति बनाएंगे। 22 जून को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में भ्रमण पर है। इसके बाद 23 जून को युवराज बुध वृषभ राशि में मार्गी चाल यानी सीधी चाल से चलने लगेंगे। इसके अलावा सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले देवगुरु बृहस्पति कुंभ राशि में और सभी ग्रहों में मंद गति से चलने वाले शनिदेव मकर राशि में वक्री चाल से चल रहे हैं। बुध और राहु ग्रह की युति वृषभ में बनी हुई है।

विज्ञापन


सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन
सूर्य का राशि और नक्षत्र परिवर्तन बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। 22 जून से 7 जुलाई तक सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में रहेंगे।  सूर्य के आर्द्रा में होने से बारिश का योग बनेगा।

शुक्र का राशि परिवर्तन
शुक्र मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गोचर करते हुए कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि पर ये 17 जुलाई की सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक गोचर करेंगे उसके बाद सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। वृषभ और तुला राशि के स्वामी शुक्र कन्या राशि में नीचराशिगत तथा मीन राशि में उच्चराशिगत संज्ञक माने गए हैं। कुंडली में शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है और सभी तरह के ऐशोआराम और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, वहीं कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होने पर वैवाहिक जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं। 
विज्ञापन


बुध की सीधी चाल
बुध ग्रह अब से सीधी चाल से चलेंगे। 23 जून से बुध वृषभ राशि में रहते हुए मार्गी हो जाएंगे। बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, तर्क-वितर्क और मित्र का कारक माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य और शुक्र, बुध के मित्र ग्रह होते हैं जबकि चंद्रमा और मंगल इसके शत्रु ग्रह हैं। जिन जातकों की जन्म कुंडली में बुध ग्रह लग्न भाव के होते हैं वह व्यक्ति आकर्षक और स्वभाव से तर्कसंगत और कुशल वक्ता होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बुध को सूर्य के समान तेजस्वी दिव्य पीतांबरधारी, संपूर्ण आभूषणों से विभूषित, अर्थशास्त्रों के ज्ञाता, उत्कृष्ट बुद्धि संपन्न, मधुर वाणी बोलने वाले महान गणितज्ञ माना गया है। मिथुन एवं कन्या राशि के स्वामी बुध मीन राशि में नीचराशिगत संज्ञक तथा कन्या राशि में उच्चराशिगत संज्ञक माने गए हैं। सूर्यदेव के साथ इनकी युति होने से बुधादित्य योग बनता है।

गुरु की टेढ़ी चाल
20 जून से देवगुरु बृहस्पति वक्री चाल से चल रहे हैं। वक्री चाल में भी गुरु ग्रह शुभ फल प्रदान करते हैं। बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है। इसलिए इन्हें गुरु ग्रह भी कहा जाता है। गुरु ग्रह को धनु और मीन राशि पर आधिपत्य है। गुरु कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने जाते है। इसके अलावा ये पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी माने जाते हैं। अगर गुरु ग्रह के कारक की बात करें तो ये धर्म, आध्यात्म, ज्ञान, शिक्षा आदि माने गए हैं। गुरु ग्रह दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो किसी एक राशि में लंबे समय तक रहते हैं। यह करीब 13 महीनों तक किसी एक राशि में गोचर करते हैं। इन 13 महीनों के दौरान लगभग चार माह वक्री अवस्था में गुजारते हैं। देवगुरु बृहस्पति को कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम एवं एकादश भाव का कारक माना जाता है।  

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें