गुरुपुष्य अमृत योग में जन्म लेने वाले जातकों के गुण अवगुण
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भारतीय ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र का गुरुवार से योग होने पर यह अति दुर्लभ गुरुपुष्यामृत योग बनता है। इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य नक्षत्र में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं। जब पुष्य नक्षत्र सोमवार, गुरुवार या रविवार को आता है, तो एक विशेष वार नक्षत्र योग निर्मित होता है। जिसका योग सभी प्रकार का शुभफल देता है। गुरुवार को इस नक्षत्र के पड़ने से गुरु पुष्य नामक योग का निर्माण होता है। ऐसा योग बहुत ही काम बनता है। ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र माने गए हैं। इनमें 8 वे स्थान पर पुष्य नक्षत्र आता है। यह बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। 25 नवंबर को गुरुपुष्य अमृत योग बन रहा है। आइए जानते हैं इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरुष और महिला जातकों के गुण अवगुण
गुरुपुष्य नक्षत्र में जन्में पुरुष जातकों के गुण-अवगुण
पुरुष जातक के गुण - इस नक्षत्र में जन्में जातक प्रतिष्ठित आकर्षक, बुद्धिमान, शक्तिशाली, प्रबल व्यक्तित्व वाले होते हैं। ये जातक आत्म केंद्रित, सद्व्यवहारी, देव धर्म को मानने वाला, धनवान, पुत्र युक्त, शांत होता है।
पुरुष जातक के अवगुण- इस नक्षत्र में जन्में जातक कठोर निर्णय लेने मे असक्षम, वाह्य दुनिया के प्रभावों को रोकने में असमर्थ होता है। इस नक्षत्र में जन्म पुरुष जातक कर्मठ तो होता है लेकिन व्यवहारिक नहीं होता। उसका चित्त अस्थिर होता है।
गुरुपुष्य नक्षत्र में जन्मीं महिला जातकों के गुण-अवगुण
महिला जातकों के गुण- इस नक्षत्र में जन्मी महिला जातक का व्यक्तित्व उदार होता है, उनका व्यक्तित्व प्रभवशाली होता है। महिला जातक स्थिर मानसिकता वाली होती है। महिला जातक हृदय से सच्चा प्यार करने वाली, सदाचार और निति मे विश्वास करने वाली होती है।
महिला जातकों के अवगुण- स नक्षत्र में जन्मी महिला जातक अज्ञानी होती हैं, दूसरों की बातों में आ जाती हैं। वे मिलनसार नहीं होती। वे उदासीन और चिड़चिड़ी होती है। ये वफादार होती हैं किन्तु पति द्वारा गलत समझी जाती हैं.