धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन करने से घर धन-धान्य से पूर्ण हो जाता है। इसी दिन यथाशक्ति खरीददारी और लक्ष्मी गणेश की नई प्रतिमा को घर लाना भी शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन जिस भी चीज की खरीदारी की जाएगी उसमें 13 गुणा वृद्धि होगी। इस दिन यम पूजा का विधान भी है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन संध्या काल में घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का योग टल जाता है। दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र से बही खरीदने का दौर प्रारम्भ हो जाता है। इसके बाद धनतेरस व दीपावली पर शुभ मुहूर्त में बही का पूजन कर इसमें लिखना प्रारम्भ करते हैं।
क्या होती है बही
बही में व्यापारी अपना वार्षिक लेखा जोखा लिखते हैं। बही के पन्ने में 8 कॉलम होते है। जिसमें तिथि, विवरण, पृष्ठांक, जमा व नामे की राशि आदि के कॉलम बने होते हैं। इसमें व्यापारी प्रतिदिन का हिसाब लिखते हैं। आवश्यकता होने पर इसे कभी भी आसानी से देख सकते हैं।
धनतेरस पर बही खरीद का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर बही खरीद का शुभ मुहूर्त चौघड़िया के अनुसार देखा जाता है। दरअसल चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तथा सूर्यास्त से सूर्योदय के मध्य का काल 30-30 घटी यानी घड़ी में मापा गया है। 30 घटी को अष्ट भाग में बांटने पर दिन और रात्रि के 8-8 चौघड़िया प्राप्त होते हैं। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 4 घटी का होता है, इसलिए इसे चौ अर्थात चार + घड़िया, घटी, या बेला के नाम से जाना जाता है। इसे चतुर्श्तिका भी कहते हैं। व्यापारियों को धनतेरस पर बही चौघड़िया के अनुसार खरीदना शुभ होता है।
धनतेरस का चौघड़िया मुहूर्त (2 नवंबर 2021)
चर चौघड़िया- प्रातः 09:19 से 10:41 तक
लाभ चौघड़िया- प्रातः10:41से दोपहर 12:04 तक
अमृत चौघड़िया- दोपहर 12:04 से 01:27 तक
काल चौघड़िया- दोपहर 01:27 से दोपहर 02:49 तक
शुभ चौघड़िया- दोपहर 02:49 से सायं 04:12 तक
रोग चौघड़िया- सायं 04:12 से सायं 05:35 तक
लाभ चौघड़िया- सायं 07:12 से रात्रि 08:50 तक
शुभ चौघड़िया- रात्रि 10:27 से रात्रि 12:04 तक (3 नवंबर)
चर चौघड़िया- रात्रि 01:42 से रात्रि 03:19 तक (3 नवंबर)
रोग चौघड़िया- रात्रि 03:19 से प्रातः 04:57 तक (3 नवंबर)
काल चौघड़िया- प्रातः 04:57 से प्रातः 06:34 तक (3 नवंबर)