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ड्रैगन को एक और झटका, भारत के विरोध के बाद चीन को मजबूरन छोड़नी पड़ी BRICS प्लस योजना

Thu, 31 Aug 2017 09:55 AM IST
amarujala.com- Presented By: त्रिनाथ त्रिपाठी
amarujala.com- Presented By: त्रिनाथ त्रिपाठी Updated Thu, 31 Aug 2017 09:55 AM IST
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After India opposed, China forced to abandon BRICS plus plan
modi xi jinping

डोकलाम सीमा विवाद के बाद चीन को एक और करारा झटका लगा है। ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले चीन को एक और मुद्दे पर भारत के सामने झुकना पड़ा है। भारत के कड़े विरोध के बाद ब्रिक्स समूह के विस्तार की योजना चीन को मजबूरन छोड़नी पड़ी।

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'ब्रिक्स प्लस' योजना का विरोध
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बीजिंग अपनी 'ब्रिक्स प्लस' योजना के बारे में समूह के दूसरे देशों को यकीन दिला पाया। जिसके चलते चीन को मजबूरन अपनी ब्रिक्स प्लस योजना छोड़नी पड़ी। बता दें कि भारत पहले से ही चीन की 'ब्रिक्स प्लस' की योजना का विरोध करता रहा है।
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पढ़ें:- डोकलाम के जरिए भारत का चीन को करारा झटका, 3 महीने में ड्रैगन को हुए 4 बड़े नुकसान
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अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित
चीन ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए मिस्र, केन्या, ताजिकिस्तान, मेक्सिको और थाईलैंड को अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित किया है लेकिन ये स्पष्ट भी कर दिया है कि ये निमंत्रण उसके 'ब्रिक्स प्लस' रुख के तहत समूह को विस्तार देने का प्रयास नहीं है।

पढ़ें:- BRICS: पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले बोला चीन, आपसी सहयोग के लिए काफी संभावनाएं

इससे पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ब्रिक्स प्लस के बारे में और अधिक व्याख्या करने की जरूरत है ताकि लोग इसके पीछे के तर्क को अच्छी तरह समझ पाएं।

कई मायनों में अहम है पीएम मोदी का चीन दौरा
ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के पहले सप्ताह में चीन जाएंगे। डोकलाम समाधान के ठीक बाद पीएम मोदी का यह दौरा कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है। चीन भी इस बात को बखूबी समझता है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से ठीक पहले चीन ने भारत को लेकर कहा कि दोनों देशों में आपसी सहयोग को लेकर काफी संभावनाएं हैं।

भारत-चीन में आपसी सहयोग के लिए काफी संभावनाएं

After India opposed, China forced to abandon BRICS plus plan

पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले चीन ने भारत को लेकर नरम रुख अख्तियार किया है। ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर हो रही प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन और भारत के बीच आपसी सहयोग के लिए काफी संभावनाएं हैं। वांग ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत और चीन एक साथ मिलकर एशिया को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे।

पढ़ें:- डोकलाम: नहीं गई ड्रैगन की हेकड़ी, चीनी मंत्री ने दी भारत को नसीहत

वहीं, डोकलाम विवाद को लेकर वांग ने कहा कि कि हमें पूरा यकीन है कि भारत इस घटना से सबक लेगा और भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा होने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि यह दो बड़े देशों के लिए यह काफी सामान्य बात है कि उनकी बातचीत में समस्याएं हों। इससे पहले चीन ने उम्मीद जताई थी कि शियामेन में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका) सम्मेलन की सफलता के लिए सभी देश अपनी-अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे

पढ़ें:- डोकलाम समाधान के बाद ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीन जाएंगे पीएम मोदी

आपको बता दें कि डोकलाम सीमा विवाद का समाधान होने के ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन का दौरा करेंगे। खबरों के मुताबिक डोकलाम विवाद को लेकर ही भारत यह तय नहीं कर रहा था कि सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए पीएम मोदी चीन जाएंगे या नहीं। बता दें कि 9वां ब्रिक्स सम्मेलन 3 से 5 सितंबर तक चीन के शियामेन में होने वाला है।

म्यांमार का भी दौरा करेंगे पीएम मोदी

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मन की बात - फोटो : Social Media

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी म्यांमार के राष्ट्रपति यू ह्टिन क्याव के आमंत्रण पर 5 से 7 सितंबर तक म्यांमार का भी दौरा करेंगे। आपको बता दें कि हाल ही में म्यांमार में हुई हिंसा पर भारत ने गंभीर चिंता जताई थी।

ब्रिक्स बनी विवाद के हल की वजह
चीन में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन ही डोकलाम विवाद के हल की असली वजह माना जा रहा है। चीन नहीं चाहता था इतने बड़े और इतने महत्वपूर्ण सम्मेलन में डोकलाम विवाद के कारण तनावपूर्ण माहौल बने। भले ही रूस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों से भारत के रिश्ते बेहद मधुर हैं। दक्षिण चीन सागर विवाद के कारण चीन की अंतरराष्ट्रीय छवि वैसे भी बहुत खराब हो चुकी है। ऐसे में चीन अपनी मेजबानी में हो रहे सम्मेलन में अपनी छवि को और नहीं बिगाड़ना चाहता था।

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