मनी प्लांट
मेरे छज्जे पर ..
वो शराब की बोतल पर लगा
पैसे का पेड़ ..,
ज्योतिषी ने सुझाया था ।
वो धर्म से क्रिश्चियन
जान पड़ता है ..
मैं हिन्दू ,
लेकिन कई सालों से रह रहे हैं साथ
मैं उसे पानी देता हूँ ,
वो मुझे ऑक्सीजन देता है ,
कभी कभार पैसे भी ।
कई बार अगरबत्तीयाँ घुमा देता हूँ ..
ये देख गमले में तौंद फैलाये तुलसी
धर्म के नाम पर नहीं चिल्लाती है ।
छज्जे से बाहर गये पत्ते नमाज़ सुनते हैं ।
कुछ मेरी घंटियों , शंख , मंत्रों की ध्वनियाँ सुनते हैं ।
बस आनंदित होते हैं ।
प्रेम करते हैं ,
बंटते नहीं ,
बांटते नहीं खुद को ..
जाति, धर्म ,लिंग ,वर्ण ।
और हम इंसान हैं ..
कहते हैं खुद को ।
- माणिक्य बहुगुना/ पंकज / चंद्र प्रकाश
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