आपका शहर Close
Home›  kavya›  Vishwa Kavya

अंतरराष्ट्रीय कविता संसार की हलचलों और ताजा कृतियों की डायरी

माया एंजेलो : वीकएंड की मौज मस्ती 

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

माया एंजेलो को नृत्य के शौकीन उन्हें एक कुशल नर्तकी, फिल्मों में दिलचस्पी लेने वाले लोग उन्हें एक भाव-प्रणव अभिनेत्री और लेखक और मानवाधिकार में विश्वास रखने वाले उन्हें एक महान लेखिका और प्रखर मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में याद करते हैं।

नोबेल विजेता विस्लावा शिम्बोर्स्का : हिटलर का पहला फ़ोटोग्राफ़

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

पोलिश कवयित्री विस्लावा शिम्बोर्स्का को साहित्य के लिए 1996 में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया था।

ब्लादीमिर मायकोव्स्की : चलाने लगता हूँ जब किसी औरत से प्‍यार का चक्‍कर

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

ब्लादीमिर ब्लादीमिरोविच मायकोव्स्की रूसी कवि, नाटककार, कलाकार और अभिनेता थे। वे रूसी भविष्यवादी आंदोलन के महत्वपूर्ण शख़्सियत के रूप में प्रसिद्ध हुए।

नोबेल पुरस्कार विजेता बोरीस पास्तरनाक : मेरी ज़िंदगी बहन 

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

वाल्ट व्हिटमन: सुन रहा हूँ गा रहा है अमेरिका

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017

'जे अल्फ्रेड प्रुफ्रोक का प्रेम गीत'

  • अर्विन्द जोशी / नई दिल्ली
  • बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

मैं विज्ञान का छात्र था और साहित्य में मेरा दख़्ल नया नया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी में बी ए इंग्लिश शुरू ही किया था। इंटरनेट का दौर नहीं था वो, सो लाइब्रेरी के अंधेरे कोनों में प्रेम कविताएं ढूंढ़ते ढूंढ़ते, अचानक एलियट की कविताओं की किताब दिखी।

ओक्ताविओ पाज़: मेरे हाथ खोलते हैं तुम्हारे अस्तित्व के पर्दे...

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

मेरे हाथ खोलते हैं, तुम्हारे अस्तित्व के पर्दे।

विलियम वर्ड्सवर्थ: नन्हीं मासूम कली

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • बुधवार, 27 सितंबर 2017

सूरज की किरणों और भीगी फुहारों में,खिलती रही एक कली बीते तीन बरसों में

फिलिस्तानी प्रेमगान: तेरी आंखें कि उतरता कोई नश्तर दिल में

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 26 सितंबर 2017

जलील आली : दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017

विलियम शेक्सपियर: सारी दुनिया एक मंच है, नर-नारी सब अभिनेता

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • रविवार, 17 सितंबर 2017

बुशरा एजाज़ : मुझे बस वो उसे सारा ज़माना चाहिए था

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 15 सितंबर 2017
View More
पाठकों के द्वारा भेजे गए
अन्य
Top
Your Story has been saved!