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अंतरराष्ट्रीय कविता संसार की हलचलों और ताजा कृतियों की डायरी

बॉब डिलन: वह ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 22 अगस्त 2017

साठ के दशक में अपने गिटार और माउथऑर्गन के साथ संगीत की दुनिया में आए बॉब डिलन को लोकगीतों का रॉक स्टार भी कहा जा सकता है। साल 2016 के लिए उन्हें साहित्य के नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया।

प्रेम गीत: तेरे अल्फ़ाज़ मेरा नग़्मा थे, मेरे होठों पे वह उभरे थे तरन्नुम बनकर

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 21 अगस्त 2017

तेरे अल्फ़ाज़ मेरा नग़मा थे, मेरे होठों पे वह उभरे थे तरन्नुम बनकर

मिक्लोश रादनोती: तुम्हारी बांहों में, मैं मौत से उबर आऊंगा...

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 17 अगस्त 2017

तुम्हारी बांहों में झूल रहा हूं मैं, चुपचाप मेरी बांहों में झूल रही हो तुम चुपचाप

चीनी कविता: सिर्फ़ एक लड़की जगा सकती है, सोया हुआ प्यार

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 8 अगस्त 2017

स्‍त्री का दिलः एक ऐसा मुल्क है जहां पासपोर्ट नहीं लगता...

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 31 जुलाई 2017

चार्ल्स बुकोव्सकी: पुरानी कार के नाम

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शनिवार, 29 जुलाई 2017

बर्तोल ब्रेख्त: मैं जानता हूं, मेरी जान...

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

20 वीं सदी के सबसे प्रतिष्ठित कवि, नाटककार और थियेटर निर्देशक बर्तोल ब्रेख्त की कविता हिंदी में पढ़ें।

चार्ल्स बुकोव्स्की की कविता 'घरेलू बिल्ला'

  • अरविन्द जोशी, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017

अमरीकी कवि चार्ल्स बुकोव्स्की की कविता का हिंदी में अनुवाद पढ़ें।

विलियम शेक्सपियर: सारी दुनिया एक मंच है, नर-नारी सब अभिनेता

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017

सारी दुनिया एक मंच है, नर-नारी सब अभिनेता, सात अवस्थाएं जीवन की, सात अंकों के नाटक में, अपना-अपना खेल दिखाकर हर इनसान चला जाता।

पाब्लो नेरूदा: अगर तुम मुझे भूल जाओ

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

ज़्देन्येक वागनेर: चली जाओ अगर तुम जाना चाहती हो...

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

खिड़की पर लड़की: तुम इस तरह किसको ताक रही हो

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • रविवार, 23 जुलाई 2017

नन्हीं मासूम कली: सूरज की किरणों और भीगी फुहारों में खिलती रही

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
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