आजादी के अमृत महोत्सव के तहत वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय काशी उत्सव की पहली शाम की महफिल को कवि कुमार विश्वास ने अपनी कविता के दम पर लूट लिया। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में अब तक होने वाले कार्यक्रम में सबसे अधिक भीड़ मंगलवार को दिखी। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में कुमार विश्वास के कार्यक्रम के लिए वैसे तो अंदर सभागार खचाखच भरा लेकिन बाहर हजारों लोगों को बिना कार्यक्रम के ही लौटना पड़ा।
ये वैसे लोग थे, जिनके हाथ में वीआईपी पास था। वे अंदर जाने के लिए सुरक्षाकर्मियों के साथ जद्दोजहद करते रहे। इधर-उधर फोन भी मिलाया लेकिन अंदर जाने का मौका नहीं मिला। हर कोई आयोजकों के प्रति अपना गुस्सा दिखा रहा था। कहा कि जब कार्यक्रम में बुलाने के लिए पास दिया गया तो अंदर भी जाने देना चाहिए।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के बाहर पुलिस कर्मियों ने लोगों को रोका
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक भारत-जापान मैत्री के प्रतीक 1200 सीटों की क्षमता वाले रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के सभागार में इस आयोजन के लिए तीन हजार से अधिक लोगों को पास वितरित किए गए थे। मंगलवार शाम गेट पर भीड़ इतनी अधिक थी कि कई थानों की फोर्स बुलानी पड़ी।
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काशी उत्सव में कुमार विश्वास
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शब्दों को अपने अंदाज में पिरो कर काव्य गढ़ने और पढ़ने वाले कुमार विश्वास बाबा की नगरी में आए तो उनके मिजाज पर भी इसका रंग छाया। काशी उत्सव की पहली संध्या पर काव्य का उल्लास बिखेरा और दीवाना भी बनाया।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का सभागार खचाखच भरा रहा तो कुछ लोगों ने खड़े होकर कुमार विश्वास की कविता को पूरे उत्साह के सुना। कुमार विश्वास ने एक के बाद एक कविता और गीत की प्रस्तुति से काशी उत्सव के पहले दिन की शाम की महफिल लूट ली।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के बाहर तैनात फोर्स
- फोटो : अमर उजाला
कुमार विश्वास ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत ये गंगा का किनारा है गीत के माध्यम से गंगा निर्मलीकरण की ओर सभी का ध्यान आकृष्ट करते हुए गंगा की महत्ता को भी बताया। इसके बाद देश वंदना में जयशंकर प्रसाद के गीत अरुण यह मधुमय देश हमारा, जहां पहुंचे अनजान क्षितिज को, मिलता एक सहारा। की प्रस्तुति से जयशंकर प्रसाद को याद किया।