ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है और इस बार ये तिथि 25 मई यानि गुरुवार को है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शनि की सही तरीके से पूजा करने से उनके प्रकोप से बचा जा सकता है। वहीं अगर किसी की कुंडली में शनि की दशा खराब चल रही है तो भी इस दिन उनकी आराधना करने से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। अमावस्या 25 मई को सुबह 5ः 07 मिनट से शुरू होकर रात 01ः 14 मिनट तक रहेगा, जो कि अगली तिथि यानी 26 मई में गिना जाएगा। जानें पूजा करने का सही तरीका
शनि जयंतीः शनिदेव के साथ ना करें इस देवता की पूजा, नहीं तो कुंडली में हो जाएंगे शनि हावी
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इन बातों का भी रखें ध्यान
शनि जयंती पर पूजा करने से पहले कई जरूरी बातों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है, नहीं तो पूरे विधि विधान से की गई पूजा भी फल नहीं देती। शनि देव की पूजा करने के दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल मालिश करके स्नान करना चाहिए।
- शनि मंदिर के साथ साथ हनुमान जी के दर्शन करना ना भूलें।
- शनि जयंती और शनि पूजा के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- अगर इस दिन आपकी किसी यात्रा का कार्यक्रम निर्धारित है तो उसे स्थगित कर दें।
- किसी जरूरतमंद गरीब व्यक्ति को तेल में बने पकवान खिलाएं।
- शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर को देखते समय उनकी आंखो में नहीं देखना चाहिए।