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भगवान की पूजा करने से पहले यहां होती है रावण की पूजा

Sat, 06 May 2017 06:04 PM IST
amarujala.com- written by: किरण सिंह
amarujala.com- written by: किरण सिंह Updated Sat, 06 May 2017 06:04 PM IST
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ravana worshipped before lord shiva

रावण को बुरी शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि रावण का दहन बुरी शक्तियों का अंत होता है। इसी कारण काफी विद्वान होने के बावजूद भी रावण की अधिकतर जगह पूजा नहीं की जाती। हालांकि देश में रावण के कुछ मंदिर है, लेकिन देश में एक ऐसा मंदिर है जहां रावण की पूजा भगवान शिव से पहले की जाती है। यह अनोखा मंदिर राजस्‍थान के उदयपुर जिले में मौजूद है। भगवान शिव का यह मंदिर कमलनाथ महादेव के नाम से प्रसिद्घ है, जो कि उदयपुर से करीब 80 किमी दूर झाडौल तहसील में आवारगढ़ की पहाड़िया पर स्थित है।

ravana worshipped before lord shiva

पुराणों के अनुसार इस मंदिर की स्‍थापना लंकापति रावण ने खुद की थी। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव से पहले यदि रावण की पूजा ना की जाएं तो सारी पूजा व्यर्थ हो जाती है।

ravana worshipped before lord shiva

कहा जाता है कि यहीं वह जगह है जहां पर रावण ने अपना शीश काटकर भगवान शिव को अग्निकुंड में अर्पित किया था। जिसे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण की नाभि में अमृत कुंड स्‍थापित किया।

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ravana worshipped before lord shiva

पुराणों की कथा के अनुसार रावण ने कैलाश पर जाकर कठोर तपस्या की और उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने वरदान मांगने को कहा। तब रावण ने शिवजी को अपने साथ लंका चलने को कहा।

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ravana worshipped before lord shiva

भगवान शिवलिंग के रूप में चलने को तैयार हो गए थे और उन्होंने रावण ‌को एक शर्त सहित शिवलिंग दिया कि लंका पहुंचने से पहले शिवलिंग को धरती पर रखा तो उसी जगह वे स्‍थापित हो जाएंगे। कैलाश पर्वत से लंका दूर होने के कारण रास्ते में रावण आराम के लिए एक स्‍थान पर रुक गया और ना चाहते हुए भी शिवलिंग को धरती पर रखना पड़ा। अपनी गलती का अहसास होने के बाद रावण ने उसी जगह पर तपस्या की और भगवान शिव को सौ कमल के फूलों के साथ पूजन किया।

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