लोग जीवन में किसी दुख या पीड़ा के कारण के मूल में ‘शनि’ को मानते हैं जबकि शनि को ईश्वर की पदवी मिली है ऐसे में वे खलनायक कैसे हो सकते हैं? लोगों की इसी धारणा को धारावाहिक ‘शनि’ ने बदली है। वहीं इसने धार्मिक धारावाहिक के दर्शकों के दायरे में विस्तार भी किया है। धारावाहिक के बाद लोग इसे अपने कर्म के परिणाम के रूप में स्वीकार करने लगे हैं। यह कहना है धारावाहिक ‘शनि’ में शनि की माता की भूमिका कर रहीं जूही परमार, सूर्यदेव का किरदार कर रहे पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सलिल अंकोला और बाल शनि कार्तिकेय मालवीय का, जो शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ दफ्तर पहुंचे।
सीरियल में शनिदेव का रोल कर रहे कार्तिकेय ने बताया, सेट्स के बीच कैसे करते हैं पढ़ाई
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बाल शनि की भूमिका कर रहे कार्तिकेय मालवीय ने बताया कि मैं इससे पहले ‘इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज’ में काम कर चुका हूं और उसमें भी मैंने बहुत पौराणिक भूमिकाएं की हैं। शनि की भूमिका बहुत अलग है। इटारसी के रहने वाले 13 साल के कार्तिकेय ने कहा कि सेट्स पर मेरी पढ़ाई जारी रहती है और मुझे टीचर पढ़ाने आते हैं।
वहीं कुमकुम के रूप में लोकप्रिय रहीं और ‘बिग बॉस’ सीजन पांच की विजेता जूही परमार ने माना कि यह उनकी वास्तविक और बड़ी वापसी है। इसके पहले उन्होंने ‘संतोषी मां’ में अतिथि भूमिका की थी। उन्होंने कहा कि पारिवारिक कारणों से मैं करीब चार वर्षों तक अभिनय से दूर रही क्योंकि मैं मां बनने वाली थी। उन्होंने कहा कि अब मैं शनि के मां की भूमिका को अधिक बेहतर ढंग से निभा सकती हूं क्योंकि मैं एक बच्ची की मां भी हूं।
जूही ने कहा कि मेरी कोशिश हमेशा से ये रही है कि पिछले काम से बेहतर कुछ करके दिखाऊं न कि पिछले काम को आगे के काम के लिए सहारा बनाऊं। उन्होंने कहा कि ‘बिग बॉस’ के बाद बहुत सारे प्रस्ताव थे, लेकिन मैंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को चुना। 5 मैं चाहती तो ये प्रस्ताव ले सकती थी, लेकिन ये उन लोगों को अंधेरे में रखने जैसा होता। मुझे इस बात का अफसोस नहीं कि मैंने बिग बॉस की सफलता का फायदा नहीं उठाया बल्कि मुझे इस बात की अधिक खुशी है कि मैंने वह अच्छे ढंग से किया जो मैं करना चाहती थी।
धारावाहिक की चर्चा करते हुए जूही ने कहा कि अगर शनि को ईश्वर की पदवी मिली है तो वे खलनायक कैसे हो सकते हैं? धारावाहिक उनके बारे में गलत धारणाओं को तोड़ता है। उन्होंने कहा कि धारावाहिक को इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसमें जीवन का दर्शन मिलता है। हम लोगों को बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित भी करते हैं।