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...तो क्या इन 6 कारणों के चलते केजरीवाल ने की है कमल हासन से मुलाकात

Fri, 22 Sep 2017 05:08 PM IST
Updated Fri, 22 Sep 2017 05:08 PM IST
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six reason behind arvind kejriwal and kamal haasan meeting in chennai

दिल्ली के मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को जब चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे तो दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपर स्टार कमल हासन की बेटी अक्षरा हासन ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से केजरीवाल सीधे कमल हासन के घर पहुंचे। लंच पर साउथ के सुपर स्टार और आम आदमी पार्टी के संयोजक की मुलाकात हुई। इस मुलकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया और ये तक कहा जाने लगा कि कमल हासन अपनी पार्टी बना केजरीवाल के सा‌थ गठबंधन करने वाले हैं। लेकिन असल में इस राजनीतिक चाल के मायने कुछ और ही हैं जिन्हें इस तरह से समझा जा सकता है।

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1. पंजाब विधानसभा और दिल्ली नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप)को मिली करारी हार के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति में भारी फेरबदल किया है। इन चुनाव परिणामों के बाद से ही 'आप' ने नकारात्मक राजनीति से तौबा कर ली है। बता दें कि इससे पहले तक 'आप' भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी को सीधे निशाना बनाती रही थी।

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2. दिल्ली में प्रचंड बहुमत हासिल कर पिछले ढाई साल से सत्ता पर काबिज 'आप' भारी उथल-पुथल से गुजरी है और इस दौरान इसके कई मंत्री सहित विधायकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं जिनमें से कई फिलहाल जेल में हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ कर सत्ता में आए केजरीवाल की छवि को इससे काफी नुकसान पहुंचा है। 
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3. ईमानदार नेता और पार्टी की अपनी छवि को फिर से चमकाने के लिए केजरीवाल अब उन लोगों से हा‌थ मिलाने की कोशिश कर रहे हैं जिनकी सार्वजनिक जीवन में ईमानदार व्यक्ति की ईमेज है। ये बात बिल्कुल साफ है कि तमिलनाडु जैसे राज्य में आम आदमी पार्टी की संभावनाएं न के बराबर हैं लेकिन कमल हासन से केजरीवाल की मुलाकात असल में ईमानदार नेता के तौर पर खुद को स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।

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4. अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक जीवन भले ही ज्यादा लंबा नहीं है लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव के चंद महीनों बाद ही पार्टी ने जिस तरह से राजधानी में भारतीय जनता पार्टी को धूल चटाते हुए विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर कब्जा किया उसके बाद केजरीवाल का कद काफी बड़ा हो गया। पार्टी को लगा कि केजरीवाल का चेहरा ही उनके लिए काफी है लेकिन पंजाब, गोवा विधानसभा और दिल्ली नगर निगम चुनावों में जिस तरह से पार्टी को करारी हार मिली उसके बाद पार्टी ने केजरीवाल के चेहरे के भरोसे राजनीति करने की रणनीति में भी बदलाव किया है।

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