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सुशांत रोहिल्ला सुसाइड मामला : AMITY की अर्जी पर हाईकोर्ट ने उठाए ये सवाल

Thu, 12 Oct 2017 11:47 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Oct 2017 11:47 AM IST
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हाईकोर्ट ने एलएलबी के छात्र सुशांत रोहिल्ला के खुदकुशी मामले में देरी से अर्जी दायर करने पर एमिटी लॉ स्कूल को आड़े हाथों लिया है। इस अर्जी में मानसिक प्रताड़ना व शोषण पर फिलहाल कोई फैसला न देने का आग्रह किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत के मित्र के पत्र के आधार पर सितंबर 2016 में जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की थी। मामले की सुनवाई मार्च 2017 में हाईकोर्ट को सौंप दी गई थी। सुशांत रोहिल्ला ने 10 अगस्त 2016 को खुदकुशी कर ली थी। लॉ स्कूल ने हाजिरी कम होने के कारण उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी।

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जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल व जस्टिस नजमी वजीरी की खंडपीठ ने शिक्षा संस्थान द्वारा अर्जी दायर करने के समय पर सवाल उठाया है। इस मामले में अंतिम जिरह चल रही है। ऐसे समय में कोई अर्जी दायर नहीं की जा सकती। कोर्ट ने दूसरी ओर दिल्ली पुलिस से पूछा है कि जांच पूरी होने में कितना समय लगेगा।

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जब संज्ञेय अपराध हुआ था तो एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की। इसके अलावा उन अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने पूरे मामले में 17 अक्तूबर को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस अर्जी को फिलहाल लंबित रख लिया है।

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पेश मामले में एमिटी लॉ स्कूल व एक महिला प्रोफेसर की ओर से दो अर्जियां दायर की गई है। महिला प्रोफेसर की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि  मानसिक प्रताड़ना व शोषण के पहलू पर कोर्ट का फैसला आने से उनकी बदनामी होगी और मामले की जांच प्रभावित होगी। इसलिए इस मुद्दे पर अन्य पक्षों की दलीलों को फिलहाल न सुना जाए।
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पेश अर्जी में कहा गया है कि पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों की पुष्टि केवल पुलिस जांच से संभव है जो फिलहाल जारी है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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