मिलिए चेस के ऐसे चैम्पियन से, जिसने क्रिकेट के मैदान में अंग्रेजों से इस तरह से लगान वसूला कि उन्हें नानी याद आ गई। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
इंग्लैंड से टी20 सीरिज जीतने के बाद मैच से ज्यादा चर्चा एक नाम की हो रही है और वो है यजुवेंद्र चहल। उन्होंने इस मैच में भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मैच के जीतने के साथ ही भारत ने सिरीज भी अपने नाम कर ली। चहल ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को छकाते हुए 25 रन देकर 3 विकेट लिए। शानदार गेंदबाजी के लिए चहल को मैन ऑफ मैच और सिरीज में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सिरीज घोषित किया गया।
टीम इंडिया में शामिल युजवेंद्र चहल का करियर चेस बोर्ड से शुरू हुआ था। शंतरज में शह और मात के खेल में विरोधियों को चित्त करने वाले चहल ने चेस के अंदाज में ही बंगलूरू में इंग्लिश टीम को भी चेस बोर्ड की तरह पटखनी दी। टीम इंडिया के लिए संघर्षपूर्ण बनते मैच को चहल ने अपनी फिरकी से आसान कर टीम को जीत दिलाई। यजुवेंद्र चहल शतरंज के अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन अब क्रिकेट में धूम मचा रहे है।
चहल ने करीब 10 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर खेलना शुरू कर दिया था, वहीं 13 साल की उम्र में उन्होंने ग्रीस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया। चेस में महारथ होने के चलते चहल मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं और विरोधी की चाल को समय से पहले ही बखूबी समझ जाते हैं। चेस में चहल एशियन और वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
चहल का नाम फिडे (FIDE) की ऑफिशल साइट पर भी है और उन्हें साइट पर रेटिंग भी जबरदस्त मिली थी। चहल चेस में डूबते गए, लेकिन वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपना करियर आगे बढ़ाने के लिए स्पॉन्सर नहीं मिला। यहीं से उनका ध्यान चेस से भटका और क्रिकेट में लगा। बचपन से ही वो क्रिकेट हॉबी के तौर पर खेलते थे। इसके बाद मन बदल गया और उसने क्रिकेट को ही अपनी दुनिया बनाने की ठान ली।