जीएसटी के दायरे से शराब, पेट्रोल और डीजल को बाहर रखा गया है, लेकिन झटके वाली खबर ये है कि इनकी कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।
शराब को जीएसटी से बाहर रखने के बावजूद चंडीगढ़ में बीयर पर जीएसटी चार्ज किया जा रहा है। इस पर एडवोकेट अजय जग्गा ने एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर अजित बालाजी जोशी को शिकायत दी हैं। एडवोकेट अजय जग्गा ने डीसी को दी शिकायत में कहा है कि जीएसटी का कई जगह गलत इस्तेमाल हो रहा है। जग्गा ने डीसी से ईटीओ और इंस्पेक्टरों को इसकी जांच कराने की मांग की हैं।
अब जानिए एक सच। बेशक जीएसटी के दायरे में शराब नहीं, लेकिन इसके दाम फिर भी बढ़ सकते हैं। दरअसल, शराब बेचने पर सरकार को दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा कमाई होती है। वहीं शराब बनाने के लिए प्रयोग में आने वाले कच्चे माल को 5 से 18 फीसदी के स्लैब में रखा है, जिससे इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा और कंपनियों के लिए दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी हो जाएगी।
सबसे ज्यादा दाम बीयर के बढ़ेंगे। बियर बनाने के लिए जिन वस्तुओं का इस्तेमाल होता है उससे बीयर के दाम 15 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। बीयर के अलावा विहस्की, जिन, वोदका, रम और वाइन के दाम भी इसी तरह बढ़ जाएंगे। दूसरी ओर, अगर शराब को जीएसटी के दायरे में लाना होगा तो इसके लिए केंद्र सरकार को संविधान में संशोधन करना होगा।
यह सबसे बड़ा कारण है, जिसके कारण शराब अगले तीन-चार सालों तक जीएसटी के दायरे से बाहर रहेगी। सरकार भी शराब को जीएसटी के दायरे में नहीं रखना चाहेगी, क्योंकि यह जीएसटी के दायरे में आई तो केंद्र व राज्य दोनों की आर्थिक तौर पर कमर टूट जाएगी। पेट्रोल-डीजल पर अभी वैट और अन्य टैक्स मिलाकर के 57 फीसदी टैक्स लगता है।