15 साल लगे, तारीख-दर-तारीख 200 से ज्यादा सुनवाई हुई और 10 मिनट में राम रहीम पर फैसला सुना दिया गया। जानिए साध्वी यौन शोषण केस में बारे में।
पंचकूला सीबीआई की विशेष अदालत में शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पेश हुए। उन्हें मामले में दोषी करार दिया गया और 28 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। लेकिन दोषी करार दिए जाते ही, वो हो गया जिसका डर पिछले पांच दिनों से बना हुआ था। पंचकूला में जुटे लाखों डेरा प्रेमी भड़क गए और हिंसा पर उतर आए। पंचकूला के साथ साथ पंजाब में भी भारी हिंसा और आगजनी हुई।
अब भले ही इस केस में 15 साल बाद फैसला आया, मगर केस की शुरूआत एक गुमनाम चिट्ठी से हुई थी। 24 सितंबर 2002 को एक गुमनाम चिट्ठी (प्राइम मिनीस्टर ऑफिस) पीएमओ कार्यालय, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मीडिया के पास पहुंचती है। चिट्ठी में डेरे सच्चा सौदा साध्वियों के साथ यौन शोषण किए जाने के आरोप लगाए गए।
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बाबा गुरमीत राम रहीम केस अपडेट
पीएमओ कार्यालय ने इस चिट्ठी पर गंभीरता दिखाते हुए जांच के आदेश दिए। उधर, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। वर्ष 2002 में सीबीआई ने जांच शुरू की। वर्ष 2003 में सीबीआई के जांच अफसर केएल रैना ने डेरे में मौजूद कुछ साध्वियों के बयान दर्ज किए। लेकिन बयानों में साध्वियों ने गलत काम किए जाने की बात नहीं कही गई। वर्ष 2005 में सीबीआई दो साध्वियों तक पहुंची।
इन साध्वियों ने वर्ष 2006 में सीबीआई को बयान दिए कि वर्ष 1999 में उनके साथ डेरे में गलत काम किया गया। साध्वियों ने डेरामुखी पर यौन शोषण के आरोप लगाए। पांच साल की गहन जांच के बाद वर्ष 2007 में सीबीआई ने बाबा के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी। 4 अक्तूबर 2007 को बाबा पहली बार सीबीआई अदालत (पहले अंबाला में थी, फिर पंचकूला शिफ्ट हुई) में पेश हुए।