कुलभूषण को पाकिस्तान ने फांसी की सजा तो सुना दी, लेकिन अब उसे डर है कि अगर भारत ने ये कदम उठा लिया तो वह प्यासा मर जाएगा।
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पूर्व नौसेना कमांडर कुलभूषण जाधव की फाइल फोटो
- फोटो : File Photo
इंडियन नेवी के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को लेकर मामला गरमाता जा रहा है। पूर्व मंत्री डॉ. हरबंस लाल बताते हैं कि हाल ही अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता को फिर से शुरू कराने की बात कही तो भारत ने किसी मध्यस्थता की संभावना को सीधे खारिज कर दिया लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत इसे लपक लिया। इससे साफ दिखता है कि पाकिस्तान बातचीत को कितना आतुर है।
लेकिन अब जाधव मामले को लेकर भारत भविष्य में बातचीत की किसी संभावना को सिरे से खारिज कर सकता है। इससे पाकिस्तान को करारा झटका लगेगा। वहीं जाधव मामले को लेकर भारत फिर पाकिस्तान के खिलाफ सख्त हो सकता है। भारत से बहने वाली सिंधु नदी पाकिस्तान को हमेशा से बेचैन करती रही है। पाकिस्तान को डर है कि कहीं भारत से सिंधु जल समझौता टूट न जाये, अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान प्यास से मर जायेगा।
वहीं सार्क जैसे मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। उरी हमले के बाद भी भारत ने इस्लामाबाद में सार्क बैठक का बहिष्कार किया था और बाकी सदस्य भी हट गए थे। पूर्व मंत्री डॉ. हरबंस लाल ने कहा है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में सुनाई मौत की सजा के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है, वहीं यह मसला अलग-अलग सूबे में भी गर्मा रहा है।
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इस कश्मीरी युवक के जैसी है कुलभूषण जाधव की कहानी
डॉ. लाल ने कहा कि सरकार को जाधव को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। वे वीरवार को सरहिंद में एक समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। डॉ. लाल ने कहा कि यदि पाकिस्तान जाधव को फांसी देता है, तो इसको सोचा समझा कत्ल कहा जाएगा, और यह सरकार की बड़ी कमजोरी होगी। सरकार को पाकिस्तान के इस बेनकाब हुए चेहरे को समझते हुए, पाक को कड़ा जवाब देने की जरूरत है।