भारत और चीन के बीच चल रहे दोकलम विवाद को लेकर इंडियन आर्मी पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी विवाद को लेकर जहां सेना ने चीन के बार्डर पर जवानों की नफरी बढ़ा दी है, वहीं उत्तर भारत की तमाम सैन्य छावनियों को भी पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है।
सेना हाईकमान ने अपने खुफिया तंत्रों को चीन व पाक बार्डर की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए ज्यादा सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। चीन द्वारा बार-बार युद्ध की धमकियां दिए जाने की वजह से सेना गंभीर है और यह कदम उठा रही है।
उत्तर भारत में चीन का एक बड़ा हिस्सा भारत से सटा है। जम्मू एवं कश्मीर में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) से लेकर हिमाचल और उत्तराखंड में भी चीनी बार्डर पड़ता है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक इन्हीं सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और चौकस करने के लिए उत्तर भारत की विभिन्न सैन्य यूनिटों की बार्डर पर तैनाती की जा रही है। इसके अतिरिक्त सैन्य यूनिटों को अपनी एक्सरसाइज भी जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
चीन पर दबाब के तीन बड़े कारण
चीन पहले अपने हालात देखे, उसके बाद युद्ध की धमकी दे। चीन के पास आज युद्ध का ज्यादा अनुभव नहीं है। वहीं भारत ने 1962 के बाद 1965, 1971 और 1999 के युद्ध लड़े हैं। पाक प्रायोजित आतंकवाद से भारत आज भी लड़ रहा हैं। हमारे जवानों और अफसरों में जबरदस्त जज्बा और उत्साह है। - ब्रिगेडियर मंजीत सिंह (रिटायर्ड)
बंद हो जाएगा कारोबार, बिगड़ जाएगी अर्थव्यवस्था
हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा देकर 1962 में चीन ने देश के साथ बड़ा धोखा किया था। उस वक्त न तो भारतीय सेना के पास पर्याप्त गोला-बारूद था और न ही पर्याप्त जवान, इसलिए हार देखनी पड़ी। अब हालात 1962 जैसे नहीं है। चीन ने हमला किया तो न केवल मुंह की खाएगा, बल्कि भारत से उसके कारोबारी रिश्ते भी खत्म हो जाएंगे। इससे उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी। - कर्नल सतनाम सिंह (रिटायर्ड)