अंटार्कटिका की इस 'खून की नदी' को सबसे पहले ऑस्ट्रेलियन जियोलॉजिस्ट, ग्रिफ़िथ टेलर ने 1911 में खोजा था। उन्हें पहले लगा कि ये लाल रंग माइक्रोस्कॉपिक लाल रंग के शैवालों की वजह से है लेकिन उनका सोचना गलत था।
इस ग्लेशियर से पानी की जगह निकलता है 'खून', 100 साल बाद सामने आया सच
amarujala.com presented by: श्वेता पांडेय
Updated Fri, 28 Apr 2017 04:19 PM IST
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इस ग्लेशियर से पानी की जगह निकलता है 'खून', 100 साल बाद सामने आया सच
इस ग्लेशियर से पानी की जगह निकलता है 'खून', 100 साल बाद सामने आया सच
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