उत्तराखंड का साल 2016 सियासी गहमा गहमी के बीच गुजरा। साल 2017 की दस्तक के साथ राज्य में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया। प्रदेश में सियासत की गर्मी का इस वक्त जोरो पर है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही के लिए यहां के परिणाम काफी महत्वपूर्ण है। राज्य में कुछ चेहरे ऐसे है जिनके साथ पार्टी की साख भी जुड़ी हुई है। जानें इन खास शख्सियतों के बारे में...
उत्तराखंड के इन दस सियासी चेहरों के चुनावी परिणाम पर टिकी हैं सबकी निगाहें
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इंदिरा हृदयेश
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस की ही नहीं बल्कि राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ हैं, जो अपने दम पर सियासत करती है। चुनाव जीत और संख्याबल बहुमत की कसौटी पर खरा उतरा तो वह मुख्यमंत्री के पद की दावेदार होंगी और चुनाव हार गईं तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा। इंदिरा हल्द्वानी सीट से चुनावी मैदान में हैं।
प्रीतम सिंह
पार्टी - कांग्रेस
विधानसभा सीट - चकराता
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में है। चकराता क्षेत्र में मंदिर में दलितों को प्रवेश करने से रोकने का मामला उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
किशोर उपाध्याय
विधानसभा सीट - सहसपुर
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और दिग्गज नेता किशोर उपाध्याय सहसपुर से चुनावी मैदान में हैं। 2002 और 2007 में टिहरी विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे, लेकिन 2012 का चुनाव उनके लिए खास नहीं रहा। इस बार उनका मुकाबला उन्हीं की पार्टी के बागी अर्येंद्र शर्मा से है। ऐसे में खुद की प्रतिष्ठा बचाना उनके लिए जरूरी है।
अजय भट्ट
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट - रानीखेत
ऐसा माना जाता है कि राज्य की रानीखेत सीट से जिस पार्टी का उम्मीदवार जीतता है उस पार्टी की सरकार कभी नहीं बनी है। 2002 और 2012 में जीत दर्ज करने वाले अजय भट्ट को इस सीट पर जीतना स्वयं की प्रतिष्ठा के लिए ज्यादा जरूरी है।