नीति आयोग को दिल्ली के अभिजात वर्ग से छूटकारा दिलवाएंगे राजीव कुमार!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अरविंद पनगढ़िया के उत्तराधिकारी के रूप में नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाए गए डाक्टर राजीव कुमार पर आयोग को दिल्ली के अभिजात वर्ग से छूटकारा दिलाने का दबाव रहेगा। संघ के जरिए नीति आयोग के कामकाज पर उठाए जा रहे सवालों के बीच कुमार ने स्वदेशी जागरण मंच के एक आयोजन में 10 जून को कहा था कि नीति आयोग की सभी नीतियां दिल्ली के अभिजात वर्ग के जरिए बनाई जा रही हैं। संघ के दबाव के बाद पद से हटाए गए अरविंद पनगढ़िया के उत्तराधिकारी के रूप में पीएम मोदी ने राजीव कुमार पर भरोसा जताया है। अब राजीव कुमार को पीएम मोदी के भरोसे पर खरा उतरते हुए नीति आयोग की अलग पहचान बनानी होगी। हालांकि इस कार्य में उन्हें संघ के तमाम संगठनों का साथ मिलेगा। क्योंकि राजीव कुमार बीते कई वर्षों से भगवा गलियारे में घुमते रहे हैं। राजीव के अलावा सरकार ने एम्स के प्रमुख डाक्टर विनोद पॉल को नीति आयोग का सदश्य बनाया है। राजीव के साथ वे भी देश की नीतियों पर आयोग को अपनी सलाह देंगे।
अर्थशास्त्री के साथ सहज योग के धनी हैं नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष
नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष राजीव कुमार अर्थशास्त्री के साथ सहज योग के भी धनी हैं। सहज योग की विद्या उन्होंने प्रसिद्ध संत निर्मला देवी से ली है। सूत्र बताते हैं कि 66 वर्षिय राजीव कुमार के जीवन का 35 वर्ष अर्थशास्त्र में बीता है तो 28 वर्ष से वे सहज योग से भी जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि संत निर्मला देवी जब जीवीत थीं तो दिल्ली में होने वाले उनके सभी आयोजनों का जिम्मा राजीव कुमार ही संभालते थे। वैसे भी राजीव कुमार को सामाजिक कार्यों में खासी रूचि रही है। पहले इंडिया के नाम से उन्होंने एक गैर सरकारी पहल की भी शुरूआत की है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि सहजयोग और अर्थशास्त्र का उनका ज्ञान दोनों मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को उचाईयों पर पहुंचाने में मदद करेगा।
काम आया पीएम मोदी के प्रति लगाव
नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद पर राजीव कुमार की नियुक्ति में भगवा संगठनों के अलावा पीएम मोदी के प्रति उनका लगाव बेहद काम आया है। सेंटर फॉर पोलिसी रिसर्च से जुडे कुमार ने पीएम मोदी पर एक पुस्तक लिखी थी। 2016 में मोदी और उनकी चुनौतियां नाम से बाजार में आई पुस्तक की मांग काफी देखी गई। नीति आयोग की पहली बैठक में जब पीएम मोदी ने देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों से मुलाकात एवं बातचीत की थी तब उस बैठक में भी राजीव कुमार उपस्थित थे। नोटबंदी पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान पर पलटवार कर राजीव कुमार ने अपरोक्ष रूप से पीएम मोदी के कदम का बचाव कर उन्हें ताकत ही प्रदान किया था।
भगवा खेमे में सक्रिय रहे हैं राजीव कुमार
अरविंद पनगढ़िया के इस्तीफे के बाद संघ ने सरकार के सामने उनके उत्तराधिकारी के रूप में किसी व्यक्ति के नाम को आगे नहीं किया था। मगर सरकार को संघ नेतृत्व ने इतना सुझाव जरूर दिया था कि नीति आयोग का अगला उपाध्यक्ष संघ की अपेक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। स्वदेशी जागरण मंच हमेसा से इस बात की वकालत करता रहा है कि विदेश या विश्व बैंक में कार्य करने वालों के बजाय सरकार को ऐसे लोगों को नीति निर्धारण में शामिल करना चाहिए जोकि देश की मिट्टी में पले बडे हों और इसकी मिट्टी को पूरी तरह समझते हों। स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि देश के अनुरूप ही कृषि एवं उद्योग नीति बननी चाहिए। नीति आयोग अब तक इसमें नाकाम रहना है। वैसे राजीव कुमार भगवा संगठनों के बीच सक्रिय रहे हैं। स्वदेशी जागरण मंच के अलावा वे संघ-भाजपा के कई नेताओं से जुडे रहे हैं। भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे के छोटे से आयोजनों में भी वे उपस्थित रहते थे। इसके अलावा उन्हें संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का भी करीबी माना जाता है।
यूपी की मिट्टी में बडे हुए हैं राजीव कुमार
नीति आयोग उपाध्यक्ष पद पर संघ की नीति का अनुसरण करते हुए सरकार ने यूपी की मिट्टी में बडे हुए राजीव कुमार को आयोग की कमान दी है। इस पद पर कुमार की नियुक्ति से साथ ही भारत सरकार में यूपी का दबदबा और बढ गया है। राजीव ने बीए,एमए की शिक्षा के अलावा पीएचडी की शिक्षा भी लखनउ विश्वविधालय से पूरी की है।
उसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आए और बाद में वे डीफील की उपाधी लेने के लिए आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय चले गए। वहां से लौटने के बाद उन्होंने भारत सरकार के इंडस्ट्री और वित्त मंत्रालय में अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। एशियन विकास बैंक और फीक्की सरीखे तमाम संगठनों से जुडे रहने के बाद वे पुणे स्थित गोखले इंस्टीटयूट आॅफ इकोनामिक्स एंड पालिटिक्स के चासंलर पर पर विराजमान हैं।