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पाक की अवैध हिरासत में जाधव की जान को खतरा, अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाएगा भारत

Thu, 11 May 2017 03:46 AM IST
amarujala.com-Presented by- संदीप भट्ट
amarujala.com-Presented by- संदीप भट्ट Updated Thu, 11 May 2017 03:46 AM IST
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kulbhushan Jadhav's life threatens  illegal custody of Pakistan's said India
भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव को अवैध तरीके से कैद कर रखा है। वहां उनकी जान को खतरा है, इसलिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में जाने का निर्णय लिया। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि जाधव के मामले में भारत ने 16 बार काउंसलर भेजने की अनुमति मांगी, लेकिन पाकिस्तान ने हर बार इसे नकार दिया। भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) द्वारा जाधव की फांसी की सजा पर लगाई गई रोक का स्वागत किया है। 
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल वागले ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जाधव की मां द्वारा दायर याचिका के बारे में भी पाक ने अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है। प्रवक्ता के मुताबिक यह फैसला सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के बाद लिया गया था।
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प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने जाधव से राजनयिक संपर्क की अनुमति देने के अनुरोध के साथ ही मौखिक और लिखित तौर पर कई बार जाधव मामले में अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव अवैध हिरासत में हैं और उनकी जिंदगी खतरे में है। जाधव को ईरान से अगवा करके वहां लाया गया है और निष्पक्ष जांच का मौका भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे भारत की तरफ से इस मामले की वकालत कर रहे हैं।

भारत ने कहा है कि जाधव मामले में पाकिस्तान ने वियना समझौते के एक भी निर्देश और नियमों का पालन नहीं किया। इस मामले में आईसीजे में होने वाली सुनवाई में जाधव का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि वियना समझौते के तहत दायर इस मामले में आईसीजे के निर्देशों-फैसलों की पाकिस्तान अनदेखी नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि जाधव से जुड़ा मामला शीशे की तरह साफ है। आखिर किसी भी देश में आरोपी को अपना बचाव करने केअधिकार से कैसे वंचित किया जा सकता है?

46 साल बाद आईसीजे पहुंचा भारत 

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हालांकि भारत और पाकिस्तान 1960 में ही आईसीजे का हिस्सा बने, मगर भारत ने 46 साल बाद आईसीजे में मामला दायर किया है। वियना समझौते में कई तरह की तकनीकी अड़चनें हैं, इसलिए भारत इससे पहले कारगिल युद्घ के दौरान अपने एक सैन्य अधिकारी की नृशंस हत्या के मामले को आईसीजे में नहीं उठाया था।

जबकि पाकिस्तान भी भारतीय सीमा में अपने हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बावजूद आईसीजे नहीं गया था। इससे पहले 1971 में भारत इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण के बाद अपने हवाई क्षेत्र में पाकिस्तानी विमानों के उड़ने संबंधी अधिकार के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालत पहुंचा था। हालांकि अदालत का फैसला पाकिस्तान के पक्ष में आया था।

पीएम शरीफ ने की पाक सेना प्रमुख से चर्चा 

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय अदालत की तरफ से भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक के मामले में सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से चर्चा की।

जियो न्यूज के अनुसार 90 मिनट तक चली बैठक के दौरान प्रधानमंत्री शरीफ को जाधव मामले के संबंध में ताजा स्थिति की जानकारी दी गई। चैनल ने बताया कि बैठक के दौरान पाक-अफगान संबंध और डॉन न्यूजपेपर में सेना व सरकार के बीच विवाद समेत अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई। एक सप्ताह के भीतर शरीफ-बाजवा के बीच यह दूसरी बैठक है।

कितना बाध्यकारी है अंतरराष्ट्रीय अदालत का आदेश

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भारत की कोशिशों के बाद अब कुलभूषण जाधव के मामले पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में 15 मई को सुनवाई होगी। भारत और पाकिस्तान को अब यहां लिखित हलफनामा देना होगा। कानूनी जानकारों के मुताबिक इस हलफनामे को तब तक सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, जब तक कि दोनों देश इस पर सहमत नहीं हों। इसके बाद जाधव मामले में अगले दौर की सुनवाई के दौरान बहस शुरू होगी। बहस के बाद अंतरराष्ट्रीय अदालत सार्वजनिक रूप से अपना फैसला सुनाएगी। आईसीजे का यह आदेश अंतिम माना जाएगा, जिसके खिलाफ भारत या पाकिस्तान अपील नहीं कर पाएंगे।

कितना बाध्यकारी है अंतरराष्ट्रीय अदालत का आदेश
आईसीजे ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि उसके आदेश पूरी तरह बाध्यकारी हैं और चूंकि संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय अदालत के आदेश को मानने की शपथ लिए होते हैं, इसलिए उसके फैसले को लागू ना करना संभव नहीं होता। हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी शामिल हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अदालत के पास अपने आदेश को लागू करवाने के लिए कोई प्रत्यक्ष शक्ति नहीं होती है। ऐसे में किसी देश को अगर लगता है कि दूसरे देश ने आईसीजे के आदेश की तामीली नहीं की, तो वह इस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गुहार लगा सकता है।
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