हिमाचल में अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में अकेले जूझ रहे हैं वीरभद्र
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राजनीति में जय पराजय होती रहती है, लेकिन हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए इतना कठिन समय कभी नहीं आया था। कांग्रेस के करीब 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी हुई है, लेकिन अभिमन्यु की तरह भाजपा की व्यूह रचना को तोड़ने में वह अकेले ही जुटे हैं।
कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड भी इसमें वीरभद्र की कोई खास मदद नहीं कर पा रहा है। इसके बावजूद कांग्रेस को भरोसा है कि बुशहर के राजा वीरभद्र सिंह अपनी सूझबूझ, राजनीतिक पकड़ और दांवपेंच से भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल पर भारी पड़ेंगे।
इन वजहों से वीरभद्र हैं अभिमन्यु
कांग्रेस पार्टी के हिमाचल चुनाव प्रभारी सुशील कुमार शिंदे राज्य में गोटियां जरूर बिछा रहे हैं, लेकिन इसका भी आधार वीरभद्र सिंह ही हैं। इसके अलावा वीरभद्र को राज्य में चुनाव प्रचार को धार देने के लिए किसी अन्य बड़े कांग्रेसी नेता की मदद नहीं मिल पा रही है।
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अंबिका सोनी ने वहां कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा को हिमाचल से ज्यादा दिल्ली की राजनीति में रुचि है। कहा जाता है कि आनंद शर्मा का न तो वहां बड़ा जनाधार है और न ही पार्टी की केंद्रीय ईकाई में कोई और ऐसा चेहरा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अभी तक हिमाचल में जाकर प्रचार शुरू नहीं किया है। करीब 15 प्रतिशत ब्राह्मण की आबादी वाले हिमाचल में पार्टी ने उन्हें लुभाने के लिए कोई चेहरा नहीं पेश किया है। ले देकर वीरभद्र के पास 37 प्रतिशत की संख्या के साथ ठाकुर बहुल राज्य में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सिवाय किसी का सहारा नहीं है। इतना ही नहीं वीरभद्र को इसके बाद अपनी ही पार्टी में राज्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू गुट से भी जूझना पड़ रहा है।
भाजपा को किया मजबूर
83 वर्षीय वीरभद्र सिंह की सरकार एंटी इनकंबेंसी का सामना कर रही है। इसके बावजूद उन्होंने भाजपा को न केवल मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रेम कुमार धूमल का नाम घोषित करने के लिए मजबूर कर दिया, बल्कि हिमाचल विधानसभा का चुनाव भी मोदी बनाम वीरभद्र से हटकर वीरभद्र बनाम धूमल हो गया है।
वीरभद्र तंज कसने, राजनीति में करंट पैदा करने में माहिर हैं। जिस तरह से उन्होंने अपनी सरकार में मंत्री रहे अनिल शर्मा की तारीफ की है, उसी अंदाज में उन्होंने पूर्व दूरसंचार मंत्री पंडित सुखराम को गद्दार भी कहा है। इसे वीरभद्र के अंदाज में जनता को दिया गया संदेश माना जा रहा है।
राजनीति के राजा हैं वीरभद्र
वीरभद्र की प्रोफाइल राजनीति के भी राजा वाली है। राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय राजनीति में जीवित नेताओं में संभवत: वीरभद्र सिंह पहले ऐसा नेता हैं, जिन्हें करीब 50 साल की राजनीति में कभी हार का मुंह नहीं देखना पड़ा है। वीरभद्र सिंह विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री रहे हैं।
वह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री के तौर पर राज कर चुके हैं और यदि इस बार पार्टी को सफलता मिलती है तो वह सातवीं बार भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के भावी मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम की घोषणा कर दी है। 13 बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुके वीरभद्र चार बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रह चुके हैं।