रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने जमीन, वायु क्षेत्र और जल क्षेत्र से मिसाइल दागने की क्षमता पहले ही हासिल कर ली थी। अब वह अंतरिक्ष से भी ऐसा करने में सफल हो गया है। हालांकि अमेरिका भी इस क्षमता को विकसित करने में लगा हुआ है, लेकिन ऐसा लगता है कि पहले बाजी चीन ने मार ली है।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी एक संपादकीय टिप्पणी में लिखा है- ‘चीन ने अपनी परमाणु क्षमता से लैस हाइपरसोनिक मिसाइल से पूरी दुनिया को घेर लेने की क्षमता हासिल कर ली है या नहीं, यह दीगर सवाल है। लेकिन यह तर्क अब पूरे भरोसे के साथ दिया जा सकता है कि वह अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से गंभीर प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर गया है। चीन के पास अनगिनत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनसे चीन अमेरिकी जमीन पर विनाशकारी हमले कर सकता है। अब उसके हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण इस चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए कि चीन अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली को परास्त करने में सक्षम है।’
ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन की सारी सैनिक तैयारी ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर पर केंद्रित है। इन इलाकों से भौगलिक निकटता और यहां संसाधान बढ़ाने की वजह से इस क्षेत्र में चीन अमेरिकी सेना पर अपनी बढ़त बनाए रखेगा। अखबार ने कहा कि चीनी समाज में ऐसी मजबूत अपेक्षाएं हैं कि चीन ऐसा करे। अखबार ने कहा है कि बाकी दुनिया में अमेरिका का दबदबा बना रहेगा, लेकिन इस क्षेत्र में उसकी ताकत उसकी श्रेष्ठता की गारंटी नहीं कर पाएगी। चीन की ऐसी मंशाओं का जिक्र करते हुए द गार्जियन ने कहा है कि चीन पूर्वी एशिया में अपनी ऐसी हैसियत बनाने में जुटा है, जिससे उसे कोई चुनौती ना दे सके।