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QUAD और AUKUS का जवाब!: क्या अमेरिकी दबदबे के लिए चुनौती है चीन की नई मिसाइल क्षमता?

Tue, 19 Oct 2021 07:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने जमीन, वायु क्षेत्र और जल क्षेत्र से मिसाइल दागने की क्षमता पहले ही हासिल कर ली थी। अब वह अंतरिक्ष से भी ऐसा करने में सफल हो गया है। हालांकि अमेरिका भी इस क्षमता को विकसित करने में लगा हुआ है, लेकिन ऐसा लगता है कि पहले बाजी चीन ने मार ली है...
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चीन DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल - फोटो : Agency
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लंदन, 19 अक्टूबर। चीन की परमाणु क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण करने की खबर से पश्चिमी दुनिया अभी भी चकित हैं। जबकि चीन अपनी इस कामयाबी को प्रचार से दूर रखने की कोशिश में है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे चीन का रूटीन परीक्षण बताया। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी पश्चिमी मीडिया की प्रतिक्रिया को बेमतलब बताया। उसने एक टिप्पणी में कहा कि इस कामयाबी के बावजूद सैनिक क्षेत्र में अमेरिका का वर्चस्व कायम रहेगा। हालांकि उसने यह जरूर कहा कि सैनिक शक्ति के मामले में चीन और अमेरिका के बीच की खाई अब कम हो रही है।

चीन के अंतरिक्ष में परमाणु क्षमता वाली मिसाइल का परीक्षण करने की खबर सबसे पहले प्रमुखता से ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने दी थी। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में इस बताया कि इस खबर से अमेरिका का खुफिया तंत्र हैरान रह गया है। उसे अंदाजा नहीं था कि इस क्षेत्र में चीन ने इतनी प्रगति कर ली है। फाइनेंशियल टाइम्स ने कहा कि चीन अब अंतरिक्ष के निम्न कक्ष (लो ऑर्बिट) में मिसाइल भेजने में सफल हो गया है, जिससे अमेरिका का मिसाइल रक्षा तंत्र बेअसर हो जाएगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का मिसाइल रक्षा तंत्र निश्चित गति और दिशा में दागी गई मिसाइलों को रोकने के लिए बना है। चीन ने जिस प्रकार की मिसाइल दागी, उसे रोकने में वह कामयाब नहीं होगा।

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रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने जमीन, वायु क्षेत्र और जल क्षेत्र से मिसाइल दागने की क्षमता पहले ही हासिल कर ली थी। अब वह अंतरिक्ष से भी ऐसा करने में सफल हो गया है। हालांकि अमेरिका भी इस क्षमता को विकसित करने में लगा हुआ है, लेकिन ऐसा लगता है कि पहले बाजी चीन ने मार ली है।

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी एक संपादकीय टिप्पणी में लिखा है- ‘चीन ने अपनी परमाणु क्षमता से लैस हाइपरसोनिक मिसाइल से पूरी दुनिया को घेर लेने की क्षमता हासिल कर ली है या नहीं, यह दीगर सवाल है। लेकिन यह तर्क अब पूरे भरोसे के साथ दिया जा सकता है कि वह अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से गंभीर प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर गया है। चीन के पास अनगिनत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनसे चीन अमेरिकी जमीन पर विनाशकारी हमले कर सकता है। अब उसके हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण इस चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए कि चीन अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली को परास्त करने में सक्षम है।’

ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन की सारी सैनिक तैयारी ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर पर केंद्रित है। इन इलाकों से भौगलिक निकटता और यहां संसाधान बढ़ाने की वजह से इस क्षेत्र में चीन अमेरिकी सेना पर अपनी बढ़त बनाए रखेगा। अखबार ने कहा कि चीनी समाज में ऐसी मजबूत अपेक्षाएं हैं कि चीन ऐसा करे। अखबार ने कहा है कि बाकी दुनिया में अमेरिका का दबदबा बना रहेगा, लेकिन इस क्षेत्र में उसकी ताकत उसकी श्रेष्ठता की गारंटी नहीं कर पाएगी। चीन की ऐसी मंशाओं का जिक्र करते हुए द गार्जियन ने कहा है कि चीन पूर्वी एशिया में अपनी ऐसी हैसियत बनाने में जुटा है, जिससे उसे कोई चुनौती ना दे सके।
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