असम की वन्यजीव जीवविज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन को दुनिया का प्रतिष्ठित व्हिटली गोल्ड अवार्ड 2024 से नवाजा गया। इसे ग्रीन ऑस्कर भी कहा जाता है। व्हिटली फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूएफएन) से एक लाख पाउंड
(भारतीय करेंसी में लगभग 1.04 करोड़ रुपये) की राशि मिलेगी। यह सम्मान दुनियाभर में वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय काम करने वाले पर्यावरण कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। असम की रहने वाली वन्यजीव जीवविज्ञानी पूर्णिमा को लुप्तप्राय ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क और उसके आर्द्रभूमि निवास स्थान के संरक्षण प्रयासों के लिए इस अग्रणी चैरिटी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
कनाडा के पीएम ट्रूडो (फाइल)
- फोटो : एएनआई / सीपीएसी
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मौजूदगी में खालिस्तान समर्थक नारों से जुड़े एक सवाल पर भारत ने कहा कि यह घटना उस देश की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस घटना की कड़ी निंदा की। भारत ने जोर देकर कहा कि कनाडा में अलगाववाद, उग्रवाद और हिंसा को राजनीतिक प्रश्रय मिल रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पीएम ट्रूडो ने पहले भी इस तरह की टिप्पणी की है। उनकी टिप्पणी एक बार फिर दिखाती है कि कनाडा में अलगाववाद, उग्रवाद और हिंसा के अलावा आपराधिकता के माहौल को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, इससे भारत-कनाडा संबंधों पर भी असर पड़ता है। बता दें कि टोरंटो में आयोजित खालसा दिवस समारोह के दौरान, कनाडाई पीएम ट्रूडो के साथ-साथ विपक्षी नेता पियरे पोइलिवरे भी मौजूद थे। उनकी उपस्थिति में खालिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने की खबरें सामने आई थीं।
अमेरिका के कोलंबिया और दूसरे विश्वविद्यालयों में हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर भारत ने कहा है कि इन घटनाओं पर करीबी नजर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है। हालांकि, जिम्मेदारी की भावना और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच सही संतुलन होना बहुत जरूरी है। बता दें कि पश्चिम एशिया के गाजा में इस्राइली सेना के हमले के मद्देनजर पैदा हुए मानवीय संकट के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। कोलंबिया के अलावा येल और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे विरोध प्रदर्शन देखे गए। इनके बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा, सरकार ने इन घटनाओं से जुड़ी खबरें देखी हैं। भारत का मानना है कि हर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा व कानून व्यवस्था के बीच सही संतुलन होना चाहिए।
13वीं भारत-ब्रिटेन कार्यकारी संचालन समूह की बैठक
भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना के बीच 13वीं भारत-ब्रिटेन कार्यकारी संचालन समूह की बैठक 1-2 मई 2024 को लंदन में आयोजित की गई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मेजर जनरल अभिनय राय, एडीजी एसपी और ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मेजर जनरल जोनाथन स्विफ्ट ने किया। इससे पहले, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया हाउस में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरास्वामी से मुलाकात की।