करीब 22 साल 11 महीने पहले यानी 11 सितंबर 2001 में दुनिया की महाशक्ति माने जाने वाला अमेरिका आतंकी हमलों से दहल उठा था। इस आतंकी हमले में करीब तीन हजार लोगों की जान चली गई थी। भय और दहशत का वो मंजर पूरी दुनिया ने अपने आंखों के सामने होते देखा था। अब इस पूरे खौफनाक हमलों का मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद और उसके दो साथी अदालत के सामने अपना गुनाह कबूल करने को तैयार हो गए हैं। आइए जानते हैं न्यूयार्क में हुए 9/11 हमलों के गुनहगार खालिद के बारे में सबकुछ।
साल 2003 में किया था गिरफ्तार
अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के सबसे भरोसेमंद और बुद्धिमान सिपहसलारों मे एक खालिद शेख मोहम्मद को केएसएम के नाम से भी जाना जाता है। उसे पाकिस्तान से मार्च 2003 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसने तीन साल सीआईए की गुप्त जेलों में गुजारे। साल 2006 में वह ग्वांतानामो बे की जेल में लाया गया।
फ्राइड चिकन है पसंद
गिरफ्तारी के 20 साल बाद मास्टमाइड खालिद अपनी गलती मानने के लिए तैयार हुआ है। मोहम्मद को चरमपंथियों के सर्किल में मुख्तार भी कहा जाता है। इसके अलावा, फ्राइड चिकन पसंद करने की वजह से उसे उसके साथी केएफसी कह कर भी चिढ़ाते हैं।
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अक्खड़, घमंडी और छोटे कद...
अक्खड़, घमंडी और छोटे कद वाले शेख की छवि बात-बात में गुस्सा करने वाले की भी है। अब उसकी उम्र लगभग 60 साल है। इंजीनियर के रूप में प्रशिक्षित शेख ने अमेरिका के खिलाफ कई बड़े हमलों में भूमिका निभाई है।
क्या थी 9/11 की घटना?
चरमपंथियों ने दो अमेरिकी यात्री विमानों को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड टॉवर की दो गगनचुंबी इमारतों से टकराया था। इस हादसे में हजारों लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे से न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया दहल गई थी। तब से इसे दुनिया के सबसे ख़ौफनाक हादसों में गिना जाता है। पूर्वी अमेरिका में उस दिन चार यात्री विमानों को आत्मघाती हमलावरों ने हाइजैक किया था। इसके बाद उन्होंने इसका इस्तेमाल न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन की बेहद मशहूर इमारतों पर हमले के तौर पर किया।
दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दो इमारतों से टकराए थे। पहला विमान स्थानीय समय के मुताबिक आठ बजकर 46 मिनट में उत्तरी टॉवर से टकराया जबकि दूसरा विमान नौ बजकर तीन मिनट पर दक्षिणी टॉवर से टकराया था। इस हादसे से दोनों इमारतों में आग लग गई थी। ऊपर की मंजिलों में लोग फंस गए थे और पूरा शहर धुएं से भर गया था। दो घंटों के अंदर 110 मंजिली इमारत पूरी तरह से ढह गई और मलबे में तब्दील हो गई थी। थोड़ी देर बाद नौ बजकर 37 मिनट में तीसरा विमान वॉशिंगटन डीसी से थोड़ी दूर स्थित अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से टकराया था। जबकि चौथा विमान दस बज कर तीन मिनट में पेन्सेल्विनिया के मैदानों में क्रैश कर गया था। माना जाता है कि इस विमान से चरमपंथी वॉशिंगटन डीसी की कैपिटल बिल्डिंग पर हमला करने वाले थे।
कितने लोगों की हुई थी मौत?
इस हादसे में कुल 2,977 लोगों (19 चरमपंथी को छोड़कर) की मौत हुई थी, इनमें से अधिकांश लोगों की मौत न्यूयॉर्क में हुई थी। इन चार विमानों में कुल 246 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे। सभी को अपनी जान गवानी पड़ी। वर्ल्ड ट्रेड टॉवर की दोनों इमारतों के गिरने से 2,606 लोगों की मौत हुई। वहीं, पेंटागन में हुए हमले में 125 लोगों की मौत हुई थी।
इन घटनाओं में शामिल होने का दावा
खालिद शेख मोहम्मद का दावा है कि उसने 1993 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर बमबारी में मदद की थी जिसमें छह लोग मारे गए थे। इसके अलावा, साल 2002 में अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल का सिर कलम करने में मदद की थी।
16 साल की उम्र में ही ले ली थी इसकी सदस्यता
1960 के दशक के मध्य में कुवैत में रहने वाले पाकिस्तानी परिवार में पैदा हुए खालिद शेख मोहम्मद की जड़ें बलूचिस्तान में हैं। उसका कहना है कि उसे 16 साल की उम्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की सदस्यता ली थी और यहीं से हिंसक जिहाद के प्रति उमड़ा उसका प्यार पूरे जीवन में शामिल हो गया।
अमेरिका में रहना पड़ा था जेल में
जीवनी लेखक रिचर्ड मिनिटर के अनुसार सन् 1983 में, मोहम्मद अपनी पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चला गया और कुवैत से आए अरबों के एक छोटे समूह के साथ रहने लगे। यहां से यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की और इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। हालांकि, एक अमेरिकी खुफिया अधिकारी की माने तो खालिद का अमेरिका में सीमित और गलत अनुभव उसे आतंकवादी बनने की राह पर ले गया। दरअसल, पढ़ाई के दौरान बिल नहीं भर पाने के कारण उसे थोड़े समय के लिए जेल में रहना पड़ा था।
इन लड़ाइयों में भी शामिल
इसके बाद 1987 में उसने अफगानिस्तान की यात्रा की और सोवियत आक्रमण के खिलाफ मुजाहिदीन विद्रोहियों के साथ लड़ाई लड़ी। 9/11 आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, वह 1992 तक अफगानिस्तान में रहा और फिर सर्बों के खिलाफ मुस्लिम लड़ाकों से लड़ने के लिए बोस्निया और हर्जेगोविना चला गया।
1995 में प्रशांत महासागर में अमेरिकी विमानों को उड़ाने की असफल साजिश, जिसे ऑपरेशन बोजिंका के नाम से जाना जाता है, के बाद ही वह कुख्यात हुआ। उसने पहले 1993 में अपने भतीजे रामजी यूसुफ द्वारा रची गई विश्व व्यापार केंद्र बमबारी को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिसमें छह लोग मारे गए थे और 1,000 से अधिक अन्य घायल हो गए थे।
2001 की साजिश रचने पर बना था ओसामा का खास
जीवनी लेखक मिनिटर ने बताया कि मोहम्मद ने 1980 के दशक के अंत में अफगानिस्तान में बिन लादेन के साथ लड़ाई लड़ी, लेकिन 10 साल बाद तक उनके बीच कोई घनिष्ठ संबंध नहीं बने। हालांकि, जिस समय उसने 11 सितंबर, 2001 के हमलों की साजिश रचनी शुरू की। तब ओसामा बिन लादेन को एहसास हुआ कि जैसा वह संगठन को बनाना चाहता है, उसके लिए यह छोटा आदमी बहुत काम आएगा।
अल-कायदा की हर साजिश में मोहम्मद का हाथ था, जब तक वह गिरफ्तार नहीं हो गया। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह संभव नहीं हो सकता कि सभी आतंकी योजनाओं में सिर्फ एक अकेला आदमी केंद्र में हो।
कई यातनाएं दी गई थीं
ग्वांतानामो लाए जाने से पहले उसे सीआईए की हिरासत में 183 बार पानी में डुबोया गया था। इसके साथ ही कई और तरह की यातनाओं और कठोर पूछताछ का उसने सामना किया। ये यातनाएं ग्वांतानामो बे में सैन्य आयोग के जरिए इन लोगों पर मुकदमा चलाने की राह में सबसे बड़ी बाधा साबित हुई हैं। यातनाओं की वजह से सबूतों को कोर्ट में अमान्य करार दे दिया जाता है। इन्हीं की वजह से कार्यवाही में बहुत देरी भी हुई। इसके अलावा कोर्ट तक जाने के लिए अमेरिका से विमान की सेवा लेनी पड़ती है। यह दूरी भी एक बड़ी मुश्किल साबित हुई है।
कथित कबूलनामों में मोहम्मद ने खुद को अल कायदा के विदेशी अभियानों का मिलिट्री ऑपरेशनल कमांडर बताया है। उसका यह भी कहना है, 'मैं खुद को हीरो नही बना रहा हूं।' जून 2008 में ग्वांतानामो बे में सुनवाई के दौरान वह गिरफ्तारी के बाद पहली बार लोगों के सामने आया और तब उसने कहा था, 'मैं लंबे समय से शहादत के इंतजार में हूं।'