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Wild Poliovirus: मोजांबिक में 30 साल बाद मिला 'वाइल्ड पोलियोवायरस', पढ़िए क्या है ये और कैसे फैलता है

Sun, 22 May 2022 10:33 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पोलियोवायरस बेहद संक्रामक है और संपर्क के जरिए लोगों में फैलता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के गले और आंतों में पाया जाता है। यह शरीर में मुंह के जरिए प्रवेश करता है और संपर्क, खांसी या छींक की ड्रॉपलेट के जरिए फैलता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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मोजांबिक में लगभग तीन दशक बाद वाइल्ड पोलियो के पहले मामले की पुष्टि हुई है। साल 1992 के बाद से बच्चों की बीमारी का यह पहला मामला है। इसके अलावा इस साल मलावी में इसका प्रसार होने के बाद दक्षिणी अफ्रीका में यह वाइल्ड पोलियोवायरस का दूसरा इंपोर्टेड (बाहर से आया) मामला है। 

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अफ्रीका के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मात्शिदिसो मोएती का कहना है कि नए मामले की पुष्टि बहुत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि यह वायरस कितना खतरनाक है और यह कितनी तेजी से फैल सकता है। 

अफ्रीका को साल 2020 में वाइल्ड पोलियो से मुक्त घोषित किया गया था। हालांकि, डबल्यूएचओ का कहना है कि मोजांबिक में मिला वाइल्ड पोलियो का यह नया मामला पोलियोवायरस टाइप 1 का है और यह इस स्थिति को प्रभावित नहीं करता है क्यों कि यह एक इंपोर्टेड स्ट्रेन प्रतीत होता है। 
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पोलियो उन्मूलन वैश्विक स्वास्थ्य सफलता की सबसे बड़ी कहानियों में से एक रही है। पोलियोवायरस अब केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में स्थानीय महामारी है। मोजांबिक में मिले मामले की पहचान उत्तर-पूर्वी टेटे प्रांत में हुई है। संक्रमित बच्चा मार्च के अंत से पैरालिसिस के लक्षण महसूस कर रहा था।

जीनोमिक सीक्वेंसिंग एलानिसिस से संकेत मिला है कि नया मामला उस स्ट्रेन से संबंधित है जो साल 2019 में पाकिस्तान में फैला था। इससे पहले ऐसा ही एक मामला इसी साल मलावी में भी मिला था। चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने मोजांबिक में मिले पोलियो के इस नए मामले को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

पोलियो क्या है?
यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है। यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (यूएससीडीसी) के अनुसार यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल में होता है और इसलिए मलत्याग करने के बाद अगर वे हाथ नहीं धोते हैं तो दूसरों को भी संक्रमित कर सकते हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे में बहुत तेजी से फैलता है।

यह वायरस संक्रमित बच्चों में पैरालिसिस की समस्या उत्पन्न कर सकता है और उन्हें अपंग बना सकता है। वहीं, कुछ मामलों में तो यह जान के लिए भी घातक हो सकता है। अभी तक इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण ने इस बीमारी के इस स्वरूप को खत्म करने के करीब पहुंचा दिया है।

यह वायरस आंतों में बहुगुणित होता है और यहीं से नर्वस सिस्टम में पहुंचता है और पैरालिसिस से ग्रस्त कर सकता है। एक बार ऐसा हो जाने पर मरीज जीवन भर के लिए अपंग को जाता है क्योंकि इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है।

पोलियो के लक्षण
यूएससीडीसी के अनुसार पोलियोवायरस से संक्रमित होने वाले 100 में से 72 लोगों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखते। चार में एक संक्रमित व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें गले में खराश, थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और पेट में दर्द जैसे लक्षण शामिल हैं। ये लक्षण दो से पांच दिन रहते हैं।

1000 मरीजों में से एक से पांच में गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं जो दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड को प्रभावित करते हैं। इसमें पैलेस्थीसिया (पैरों में चुभन का अहसास), 25 संक्रमितों में से एक को मेनिंजाइटिस (स्पाइनल कॉर्ड या/और दिमाग की कवरिंग का संक्रमण) और 200 में से एक को पैरालिसिस (शरीर के अंगों को न हिला-डुला पाना) का सामना करना पड़ता है।

भारत में पोलियो
भारत को जनवरी 2014 में पोलियोमुक्त घोषित कर दिया गया था। देश में वाइल्ड पोलियोवायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 में सामने आया था। डब्ल्यूएचओ ने 24 फरवरी 2012 को भारत को उन देशों की सूची से बाहर कर दिया था जहां वाइल्ड पोलियोवायरस अभी भी सक्रिय है और लोगों को संक्रमित कर रहा है।

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