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PM Modi: प्रधानमंत्री मोदी के रूस और आस्ट्रिया के दौरे से भारत को क्या हासिल हुआ? जानें सबकुछ

सार

प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर अमेरिका, यूरोप, चीन और मध्य पूर्व के देशों की निगाह थी। अमेरिका से मिली जुली प्रतिक्रिया आई तो चीन ने अच्छा संकेत दिया है। इस यात्रा ने अमेरिका की रूस को अलग-थलग करने की कोशिशों को करारा झटका दिया है।
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पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : X / @PMOIndia
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस और आस्ट्रिया की यात्रा पूरी करके नई दिल्ली लौट आए हैं। यूक्रेन में बच्चों के अस्पताल पर रूस के हमले के बाद प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में दिए बयान ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उंचाई दे दी है। आस्ट्रिया के वियना में भी प्रधानमंत्री ने शांति की बात की। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी मोदी के इस दौरे ने खूब वाहवाही हुई। दिलचस्प है कि प्रधानमंत्री के दिल्ली लौटने से पहले चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मामलों के मंत्री वांग यी ने भी अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ लद्दाख में गतिरोध पर एक कदम आगे बढ़ाने का संदेश दिया है।  

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सामरिक और रणनीतिक साझेदारी के विशेषज्ञ प्रधानमंत्री के दौरे को सफल बता रहे हैं। विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी एसके शर्मा कहते हैं कि प्रधानमंत्री ऐसे पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने रूस में दौरे के दौरान इतनी बड़ी बात कही है। उन्होंने रूस का बिना नाम लिए कहा कि जब हम मासूम बच्चों को मरते हुए देखते हैं तो दिल दहल जाता है। यह असहनीय है। यह दर्द बहुत बड़ा है। यह भारत को अस्वीकार्य है। 

पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह भी कहते हैं कि प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य ने उनके कद को काफी बड़ा बना दिया है। आखिर यह कहने की हिम्मत भी कोई चीज है। प्रधानमंत्री यहीं नहीं रुके। उन्होंने विएना में भी कहा कि यह समय युद्ध का नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध के मैदान में हम समस्याओं का समाधान नहीं ढूंढ पाएंगे, चाहे वह कहीं भी हो। यह भारत की विदेश नीति के प्रथम वाक्य जैसा है कि समस्या का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद की सुचारु और संतुलित प्रक्रिया है।  
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राष्ट्रपति पुतिन ने भी प्रधानमंत्री का दिया साथ और दुनिया को संदेश
प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर अमेरिका, यूरोप, चीन और मध्य पूर्व के देशों की निगाह थी। अमेरिका से मिली जुली प्रतिक्रिया आई तो चीन ने अच्छा संकेत दिया है। इस यात्रा ने अमेरिका की रूस को अलग-थलग करने की कोशिशों को करारा झटका दिया है। दिलचस्प यह भी है कि प्रधानमंत्री के रूस से मासूम बच्चों के मारे जाने के संदर्भ में कड़ा संदेश देने के बाद भी राष्ट्रपति पुतिन ने इसे सकारात्मक लिया। राष्ट्रपति पुतिन ने भी कहा कि उनका देश शांति और स्थायितत्व का पक्षधर है। दोनों शिखर नेताओं के बीच इस मुद्दे पर न तो कोई असहमति सामने आई और न किसी ने किसी के विरुद्ध कोई बयान दिया। 

हालांकि जिस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मास्को में थे, उसी समय भारत के साथ छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले पाकिस्तान का रक्षा प्रतिनिधि मंडल मास्को में रूसी अधिकारियों से चर्चा कर रहा था। दूसरी तरफ अमेरिका में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी थे। अमेरिका में नाटो देशों के 32 सदस्य देश भी वार्ता की मेज पर थे। हालांकि राष्ट्रपति जो बाइडेन की सहमति के साथ नाटो देशों ने यूक्रेन को सैन्य सहायता जारी रखने, इसे बढ़ाने का निर्णय लिया। यूक्रेन को एफ-16 फाइटर जेट, पैट्रिएट जैसी प्रतिरक्षी मिसाइल और अन्य देने का भरोसा दिया।

सुखोई-30 एमकेआई विमानों को लेकर बड़ा गतिरोध दूर करने में सफल रहे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री एक बड़ी सफलता और लेकर लौटे हैं। रूस ने भारतीय सैन्य बलों के लिए आयातित रूसी हथियार और साजो सामान के लिए उसके कल पुर्जे की निर्बाध आपूर्ति पर सहमति जताई है। इससे रूस के तकनीशियनों और हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड के प्रयास से भारत में तकनीकी हस्तांतरण प्रक्रिया के सेवा में शामिल सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट को चुस्त दुरुस्त रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र के अन्य साजो सामान का भी रख-रखाव हो सकेगा। रूस और भारत के बीच में परमाणु उर्जा के क्षेत्र में भी बड़ी सहमति बनी है। रूस कई और परमाणु संयंत्रों की स्थापना, आपरेशन में विशिष्ट सहयोगी रहेगा। विज्ञान, तकनीकी, अंतरिक्ष समेत अन्य क्षेत्रों में भी दोनों देशों में सहमति बनी है।

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