विभिन्न देशों में ग्रीन हाउस गैसों का जितना उत्सर्जन होता है, और इस बारे में जो सूचना उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को दी है, उसमें गहरा फर्क है। ये बात अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में बताई है। इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बड़े देश जितने बड़े पैमाने पर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कर रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी वे दुनिया को नहीं दे रहे हैं।
ग्रीन हाउस गैसों में सबसे प्रमुख कार्बन डाइऑक्साइड है। दूसरे नंबर पर मिथेन गैसी आती है। इसके अलावा नाइट्रस ऑक्साइड और फ्लोरिनेटेड गैसें भी ग्रीन हाउस गैसों में शामिल हैं, लेकिन कुल उत्सर्जन में इनकी मात्रा बहुत कम होती है। वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी ये खोजी रिपोर्ट उस प्रकाशित की है, जब स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन (कॉप-26) चल रहा है। अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है- ‘कॉप-26 में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए जिन संख्याओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनसे दोषपूर्ण मानचित्र तैयार होगा।’ अखबार ने कहा है कि विश्व के नेताओं को जितने उत्सर्जन की जानकारी है, असल उत्सर्जन उससे काफी ज्यादा है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्सर्जन के बारे में दी जाने वाली सूचनाओं की विधि में खामियों को भी स्वीकार किया गया था। इस खामियों की वजह रिपोर्टिंग के कुछ समस्याग्रस्त नियम, कुछ देशों में होने वाली अधूरी रिपोर्टिंग और कुछ देशों की असल मात्रा को जानबूझ कर छिपाने की प्रवृत्तियां रही हैं। इसका परिणाम है कि दुनिया को समस्या के पूरे पैमाने की असल में जानकारी ही नहीं है।