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चुनौती: अफवाहों के कारण महमारी के बीच टीकाकरण की दर घटी, एंटी वैक्सीन पोस्ट ब्लॉक करने की मांग

Mon, 02 Aug 2021 06:53 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन/लंदन।

सार

  • सोशल मीडिया पर टीके के खिलाफ भ्रामक सूचनाओं पर रोक की मांग
  • अमेरिका के सर्जन जर्नल ने जारी की जनहित में एडवाइजरी
  • सोशल मीडिया और टेक कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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अमेरिका कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से जूझ रहा है। टीका लगवा चुके लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। वहीं जिन लोगों ने टीका नहीं लगवाया है वो संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। अमेरिका के यूएस सर्जन जर्नल ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि महामारी के इस दौर में गलत संदेशों और भ्रामक सूचनाओं से लोगों को बचाना होगा, क्योंकि लोगों के जीवन के लिए ये सबसे बड़ा खतरा है।

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अमेरिका के सर्जन जनरल की सलाह है कि सोशल मीडिया कंपनियों और टेक कंपनियों को भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। सोशल मीडिया पर चलने वाली अफवाहों के कारण लोग टीका लगवाने से बच रहे हैं। नतीजतन वायरस ऐसे लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। ब्रिटेन और अमेरिका में हुए एक सर्वे में पता चला है कि टीके को लेकर चलने वाली गलत और भ्रामक तथ्यों के कारण टीका लगवाने वाले लोगों में कमी दर्ज की जा रही है।

एंटी-वैक्सीन पोस्ट ब्लॉक हो
वैज्ञानिकों और टेक विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के इस दौर में सोशल मीडिया कंपनियों को एंटी-वैक्सीन पोस्ट से जुड़े तथ्यों को ब्लॉक करना शुरू होगा। ये अफवाह और झूठे तथ्य लोगों को टीका लगवाने से रोक रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान भी की जाए जो ट्वीटर, फेसबुक समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर टीके को लेकर गलत सूचना फैला  रहे हैं। इस तरह की पोस्ट से सिर्फ जीवन का जोखिम बढ़ रहा है।
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कोरोना संक्रमण के शुरुआती लक्षण हर उम्र में हो सकते हैं भिन्न
कोरोना संक्रमण का शुरुआती लक्षण हर उम्र वर्ग के साथ महिलाओं और पुरुषों में भिन्न्न हो सकता है। किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने सिंप्टम एप के आंकड़ों के अध्ययन के बाद ये दावा किया है।

वैज्ञानिकों ने 18 तरह के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया है जिसमें सामान्य तौर पर सूंघने की क्षमता प्रभावित होना, सीने में दर्द, लगातार खांसी, पेट में दर्द, पैरों में छाले, आंखों में सूजन, लालिमा और शरीर में दर्द प्रमुख है। प्रमुख शोधकर्ता क्लेयर स्टीव्स का कहना है कि कोरोना संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर तकलीफ से बचा जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूंघने की क्षमता अधिक प्रभावित 60 वर्ष से अधिक उम्र तक वाले लोगों में हुई, 80 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों में ये तकलीफ कम देखी गई।

पुरूषों में सांस की तकलीफ ज्यादा
शोध के अनुसार पुरुषों में सांस की तकलीफ, थकान, सर्दी और कंपकपी की तकलीफ अधिक देखी गई। वहीं महिलाओं में सूंघने की क्षमता, सीने में दर्द और लगातार खांसी जैसी तकलीफ अधिक पाई गई। इस तरह के लक्षण अल्फा वैरिएंट से संक्त्रस्मित लोगों में अधिक देखे गए। डेल्टा वैरिएंट की चपेट में आए लोगों में लक्षण थोड़े अलग थे।

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