एरिजोना के नए नियमों को राज्य के फेडरल अपील कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन नियमों का अल्पसंख्यकों पर ज्यादा खराब असर पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि तय बूथ से अलग बूथ पर डाले गए वोट से किसी तरह की धोखाधड़ी होती है, इस बात का कोई सबूत नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फेडरल अपील कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक नियम का अल्पसंख्यकों पर असर न्यूनतम होगा। दूसरे नियम के बारे में उसने कहा कि धोखाधड़ी होने का इंतजार करते हुए अलग बूथ पर वोट डालने की प्रथा जारी नहीं रखी जा सकती। फैसला कंजरवेटिव जज सैमुएल एलिटो ने लिखा।
मताधिकार विशेषज्ञ रिचर्ड हासेन ने एनपीआर से कहा- ‘जस्टिस एलिटो ने वोटिंग राइट्स के घड़ी की सूई कई दशक पीछे ले जाने की कोशिश की है। मैं यह कहने की स्थिति में हूं कि संघीय अदालत में वोटिंग नियमों को चुनौती देने के सारे रास्तों को अब संकुचित कर दिए गए हैं।’
चुनाव कानून विशेषज्ञ रिचर्ड पिल्डस ने कहा- ‘सुप्रीम कोर्ट का बहुमत एक धुरी पर चला गया। जस्टिस एलिटो ने जो फैसला लिखा है वह उन नियमों का समर्थन करता है, जैसे नियम अमेरिका में 40 साल पहले लागू थे या जैसे अभी कई राज्यों में लागू हैं।’ 1960 के दशक में बने मताधिकार कानून के जरिए ब्लैक समुदाय के लोगों को वोट देने का अधिकार दिया गया था। ये लोग सहजता से वोट डाल सकें, इसके लिए उस कानून कई नियमों को अनुमति दी गई थी। इनमें वो नियम भी हैं, जिन्हें अब एरिजोना और कई राज्यों में बेअसर कर दिया गया है। अब इस बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है।