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विवादों के बीच अमेरिका में बदले नियम : दूसरे बूथ पर डाला गया वोट अब मान्य नहीं, रिश्तेदार भी जमा कर सकेंगे मतपत्र

Fri, 02 Jul 2021 03:53 PM IST
वर्तिका तोलानी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

सुप्रीम कोर्ट ने फेडरल अपील कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए राज्य में मतदान सुविधाओं पर लगाए नए प्रतिबंधों को स्वीकार कर लिया है।
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एरिजोना राज्य में मतदान सुविधाओं पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने ये फैसला 6-3 के बहुमत से दिया। छह कंजरवेटिव जजों ने एरिजोना के नए नियमों को वैध ठहराया। जबकि तीन उदारवादी जजों ने अपने असहमत फैसले में इस पर कड़ी नाराजगी जताई। अमेरिकी मीडिया में छपी टिप्पणियों में इसे कई दशकों के बीच मताधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का सबसे दूरगामी महत्त्व का फैसला बताया गया है। अमेरिका के पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनपीआर ने तो एक टिप्पणी मे कहा है कि इस फैसले ने 1960 के दशक में पारित हुए मशहूर मताधिकार अधिनियम के ज्यादातर अवशेषों को जला डाला है।

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यह कहता है नया कानून
बता दें कि एरिजोना राज्य में कुछ समय पहले दो नए नियम लागू करने के लिए एक कानून बनाया गया था। उसके तहत एक प्रावधान यह है कि किसी अलग बूथ (यानी तय बूथ से अलग) पर डाले गए वोट को खारिज कर दिया जाएगा। साथ ही किसी मतदाता का वोट अब उसका करीबी रिश्तेदार ही लाकर बूथ में डाल सकेगा। अभी मतदाता से अधिकृत कोई भी व्यक्ति ऐसा कर सकता है। आलोचकों ने कहा है कि ये प्रस्ताव मशहूर मताधिकार अधिनियम के तहत दी गई ‘बैलट हार्वेस्टिंग’ की सुविधा के खिलाफ है। एरिजोना के नए नियमों के विरोधियों का कहना है कि इन नियमों का सबसे खराब असर ब्लैक और दूसरे अल्पसंख्यक मतदाताओं पर पड़ेगा। ये मतदाता आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक माने जाते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने फेडरल अपील कोर्ट के फैसले को किया रद्द

एरिजोना के नए नियमों को राज्य के फेडरल अपील कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन नियमों का अल्पसंख्यकों पर ज्यादा खराब असर पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि तय बूथ से अलग बूथ पर डाले गए वोट से किसी तरह की धोखाधड़ी होती है, इस बात का कोई सबूत नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फेडरल अपील कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक नियम का अल्पसंख्यकों पर असर न्यूनतम होगा। दूसरे नियम के बारे में उसने कहा कि धोखाधड़ी होने का इंतजार करते हुए अलग बूथ पर वोट डालने की प्रथा जारी नहीं रखी जा सकती। फैसला कंजरवेटिव जज सैमुएल एलिटो ने लिखा।
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इस नियम की वजह से अमेरिका कई दशक पीछे हो गया है - रिचर्ड

मताधिकार विशेषज्ञ रिचर्ड हासेन ने एनपीआर से कहा- ‘जस्टिस एलिटो ने वोटिंग राइट्स के घड़ी की सूई कई दशक पीछे ले जाने की कोशिश की है। मैं यह कहने की स्थिति में हूं कि संघीय अदालत में वोटिंग नियमों को चुनौती देने के सारे रास्तों को अब संकुचित कर दिए गए हैं।’

चुनाव कानून विशेषज्ञ रिचर्ड पिल्डस ने कहा- ‘सुप्रीम कोर्ट का बहुमत एक धुरी पर चला गया। जस्टिस एलिटो ने जो फैसला लिखा है वह उन नियमों का समर्थन करता है, जैसे नियम अमेरिका में 40 साल पहले लागू थे या जैसे अभी कई राज्यों में लागू हैं।’ 1960 के दशक में बने मताधिकार कानून के जरिए ब्लैक समुदाय के लोगों को वोट देने का अधिकार दिया गया था। ये लोग सहजता से वोट डाल सकें, इसके लिए उस कानून कई नियमों को अनुमति दी गई थी। इनमें वो नियम भी हैं, जिन्हें अब एरिजोना और कई राज्यों में बेअसर कर दिया गया है। अब इस बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है। 
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