अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ यहां हुई अपनी वार्ता में यह भरोसा दिया कि अमेरिका वन चाइना पॉलिसी (एक चीन नीति) पर कायम है। यानी ताइवान को अलग देश के रूप में मान्यता देने का उसका कोई इरादा नहीं है। लेकिन इस बातचीत के थोड़ी देर बाद अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में ब्लिंकेन ने कहा कि हमला होने की स्थिति में ताइवान की रक्षा करने के लिए अमेरिका वचनबद्ध है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि ये दोनों परस्पर विरोधी हैं।
चीनी मीडिया के मुताबिक वांग यी ने ब्लिंकेन के सामने दो टूक कहा कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा टकराव अमेरिका की ‘गलत नीतियों’ के कारण पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि चीन के नजरिए में ताइवान अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा- ‘मौजूदा हालत का सार यह है कि ताइवान के अधिकारियों ने वन चाइना ढांचे को तोड़ने की कोशिश की है और अमेरिका की ताइवान की आजादी की बात करने वाली ताकतों के साथ मिलीभगत है। अमेरिका उनका समर्थन करता है।’ वांग ने कहा- ‘हम चाहते हैं कि अमेरिका वास्तविक वन चाइना पॉलिसी का पालन करे, ना कि फर्जी वन चाइना पॉलिसी का।’
बीजिंग स्थित चाइनीज एकेडेमी ऑफ सोशल साइंसेज में रिसर्च फेलॉ लू शियांग ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘रविवार को ब्लिंकेन ने जो बयान दिया, वह रणनीतिक अस्पष्टता के दायरे में आता है। लेकिन ऐसा लगता है कि अमेरिका एक मुद्दा खड़ा कर रहा है, ताकि चीन के साथ सौदेबाजी में उसका फायदा उठा सके। अमेरिका के हाथ में चीन के खिलाफ जो कार्ड हैं, उनमें ताइवान भी एक है।’
उधर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि ब्लिंकेन ने चीन के कई कदमों के बारे में अपनी चिंता वांग को बताई। उन्होंने कहा- ‘चीन के ये कदम ऐसे हैं, जिनसे नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की अनदेखी होती है और जो हमारे और हमारे सहयोगी देशों के हितों और उसूलों के खिलाफ हैं। इनमें शिनजियांग प्रांत, तिब्बत, और हांगकांग में मानव अधिकार का हनन, और पूर्वी और दक्षिण चीन सागर और ताइवान में चीन के कदम शामिल हैं।’