अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में अब महज चार सप्ताह का समय बचा है। ऐसे में इन आखिरी हफ्तों में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी तैयारी में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुकाबला कड़ा बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है।
'इस बार का चुनाव धड़कने बढ़ा देने वाला'
एमोरी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर जाचरी पेस्कोविट्ज ने भविष्यवाणी की है कि इस बार का चुनाव धड़कने बढ़ा देने वाला होगा क्योंकि सात स्विंग राज्यों में से किसी में भी किसी भी उम्मीदवार के पास निर्णायक बढ़त नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिकी चुनाव में इलेक्टोरल कॉलेज असाधारण रूप से काफी पास होगा और लोकप्रिय वोट भी बहुत करीब होने जा रहा है।
गौरतलब है, अमेरिका में पांच नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। यहां रिपब्लिकन की ओर से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैदान में हैं। वहीं डेमोक्रेट्स ने उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को चुनावी दौड़ में उतारा है। दोनों ही नेता एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
इलेक्टोरल कॉलेज और लोकप्रिय वोटों के संबंध में दोनों उम्मीदवारों से उनकी उम्मीदों के बारे में पूछे जाने पर प्रोफेसर जाचरी ने कहा, 'मुझे लगता है कि चुनाव बहुत करीब होने जा रहा है। मुझे लगता है कि दो या तीन प्रतिशत अंकों के भीतर इलेक्टोरल कॉलेज भी असाधारण रूप से करीब होने जा रहा है। आप जानते हैं, यह बहुत संभव है कि एक संकीर्ण ( narrow) जीत होगी।'
सातों राज्यों में किसी के पास निर्णायक बढ़त नहीं
अमेरिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने आगे कहा, 'यहां तक कि यह भी संभावना है कि इलेक्टोरल कॉलेज में 269 के मुकाबले 269 सीटें टाई होंगी, जो अंत में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएंगी। आप जानते हैं कि यह बहुत करीबी मुकाबला होगा और यह इन सात राज्यों तक सीमित रहेगा। इसलिए, हाल ही में हुए सभी मतदानों से पता चलता है कि यह बहुत करीबी मुकाबला होगा। किसी भी उम्मीदवार के पास सातों राज्यों में निर्णायक बढ़त नहीं है और यह कांटे की टक्कर वाला मुकाबला होगा।'
विदेश नीति को लेकर यह कह दी बात
पेस्कोविट्ज ने अमेरिकी चुनाव में विदेश नीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी मतदाताओं के लिए विदेश नीति एक बहुत मामूली विचार है। मतदाताओं का एक बहुत छोटा वर्ग होगा जो 2024 में विदेश नीति के मुद्दों के आधार पर वोट देगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर आप जनमत सर्वेक्षण और अतीत में मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारकों को देखें, तो विदेश नीति आम तौर पर अमेरिकी मतदाताओं के लिए बहुत ही मामूली विचार है, सिवाय उन मामलों के जहां अमेरिकी सैनिक सक्रिय रूप से लड़ रहे हैं। इसलिए, वियतनाम एक बड़ा प्रमुख उदाहरण है। जबकि इराक, अफगानिस्तान में युद्ध कम उदाहरण हैं। इसलिए, पिछले चुनावों की तुलना में 2024 के चुनाव में यह एक बड़ा अंतर है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर यह दावा
रूस के साथ चल रहे युद्ध के बीच यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'यह साफ तौर पर सबसे जरूरी मामला है। इसमें बड़ी संख्या में धन भी शामिल है। लेकिन, अगर आप उन मुद्दों को देखें जिनकी मतदाता परवाह करते हैं, तो विदेश नीति केवल एक बहुत ही मामूली विचार है। इसलिए, मुझे लगता है कि कुछ मतदाता ही हैं, जो 2024 में विदेश नीति के मुद्दों के आधार पर ट्रंप और हैरिस के बीच फैसला करेंगे।'
भारतीय अमेरिकी किसे देंगे समर्थन?
विशेषज्ञ ने अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में मतदाताओं का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय-अमेरिकी हैं। दोनों पक्षों में प्रमुख भारतीय-अमेरिकी हैं। यह पूछे जाने पर कि ट्रंप और हैरिस के बीच लड़ाई में भारतीय-अमेरिकी किसका समर्थन करेंगे, उन्होंने कहा, 'औसतन, भारतीय-अमेरिकी आबादी डेमोक्रेट्स का अधिक समर्थन करते हैं। मुझे लगता है कि उनकी भारतीय पृष्ठभूमि शायद इसका एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन भले ही यह टिकट के शीर्ष पर एक गैर-भारतीय उम्मीदवार हो, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को समर्थन मिलने की उम्मीद की जाएगी।'
बता दें, कमला हैरिस की मां भारतीय थीं और उनके पिता जमैका के थे। उनके माता-पिता संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर बस गए थे। वह पहली अश्वेत महिला और पहली एशियाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं।